महराजगंज। मंगलवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में गर्भधारण पूर्व प्रसव, पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 के संबंध में वार्षिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. नीना वर्मा ने घटते लिंगानुपात और बेटियों के महत्व पर जन-जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि घटता लिंगानुपात एक बड़ी चुनौती है। इसे सही स्तर पर रखने के लिए हमें बेटे और बेटियों के भेद को खत्म करते हुए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्यशाला में उपस्थित पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों के प्रबंधक व सोनोलाजिस्टों को उनके कार्यों और दायित्वों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि अल्ट्रासाउंड केंद्र पर अल्ट्रासोनोलाजिस्ट के बैठने के समय को बोर्ड पर अंकित करें। इसके अलावा पंजीकरण, नवीनीकरण, सलाहकार समिति, दंड एवं परिवाद तथा मुखबिर योजना के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत परिवाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर किया जाता है। संवाद