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Maharajganj News: गोरखपुर से नेपाल पहुंचाई जा रही प्रतिबंधित नशीली दवाओं की खेप

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भैरहवा में युवक की गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद खुली तस्करी की पोल
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गोरखपुर से खरीदकर नेपाल में 20 गुना तक कमा लेते हैं धंधेबाज
सोनौली। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। धंधेबाज गोरखपुर से दवाएं खरीदकर सीमा के पार 20 गुना अधिक दाम में बेच रहे हैं। नेपाल में यह दवाएं प्रतिबंधित होने और अधिक मांग के कारण आसानी से बिक जाती हैं। नेपाल में स्मैक के साथ पकड़े गए एक युवक से नेपाली पुलिस को कई और महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल के भैरहवा में पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त कार्रवाई में भारत से तस्करी कर नेपाल लाए गए डायजेपॉम इंजेक्शन आईपी-दो 135 एंपुल, बुप्रेनोर्फिन इंजेक्शन आईपी-दो 135 एंपुल और फेनरगन के 135 एंपुल के साथ रोहिणी ग्रामीण नगरपालिका-1 के हनुमानगढ़िया निवासी बिरजू यादव को गिरफ्तार किया था। बरामद दवाएं गोरखपुर से खरीदी गई थीं और उन्हें सीमा के पगडंडी मार्गों के जरिए नेपाल पहुंचाया गया था।
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नेपाल पुलिस के अनुसार, आरोपी दवाओं की खेप लेकर सोनौली कोतवाली क्षेत्र के भगवानपुर के निकट नेपाल के मेनिहवा गांव पहुंचा था, जहां से आगे सप्लाई की तैयारी थी। इससे पहले ही भैरहवा पुलिस ने उसे दबोच लिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि सीमा से जितनी दूर प्रतिबंधित दवाएं पहुंचाई जाती हैं उनकी कीमत उतनी अधिक बढ़ जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, पहले बड़ी संख्या में नेपाली युवक नशीली दवाओं के सेवन के लिए भारतीय क्षेत्र में आते थे। वहीं सीमा पर पुलिस की सख्ती, ड्रग्स विरोधी अभियान और कई तस्करों की संपत्ति कुर्क किए जाने के बाद गिरोहों ने अपना तरीका बदल लिया है। अब प्रतिबंधित दवाओं की खेप सीधे नेपाल के विभिन्न शहरों तक पहुंचाई जा रही है।
रूपनदेही के डीएसपी कृष्ना कुमार चंद ने बताया कि प्रतिबंधित दवाओं के साथ गिरफ्तार युवक के खिलाफ नारकोटिक्स विभाग कार्यवाही में जुट गई है। भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय तस्करों के नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सीमावर्ती कस्बों नौतनवा, भगवानपुर, ठूठीबारी और परसा मलिक समेत कई इलाकों में नशीली दवाओं की उपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। नशे के आदी फोर्टविन, डाइजेपॉम, फेनरगन और अन्य इंजेक्शनों का मिश्रण बनाकर इस्तेमाल करते हैं। इन दवाओं का दुरुपयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक माना जाता है। एक डोज तक यह दवाएं सामान्य दवा का काम करती हैं। लेकिन दो से तीन डोज लेने पर इनसे नशा होने लगता है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में कम कीमत पर मिलने वाले इन इंजेक्शनों की नेपाल के शहरों पोखरा, भक्तपुर, बुटवल, भैरहवा, नारायणघाट और काठमांडो में 20 गुना अधिक कीमत मिल जाती है। इसी लाभ के कारण तस्कर नए-नए रास्ते अपनाकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं।
नेपाल के प्रमुख शहरों तक आपूर्ति करता था तस्कर
भारत-नेपाल सीमा से होकर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। हाल ही में भैरहवा नेपाल पुलिस ने नशीली दवाओं और इंजेक्शनों के साथ एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस अवैध कारोबार के कई पहलू सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपी लंबे समय से सीमा क्षेत्र और नेपाल के विभिन्न शहरों में नशीली दवाओं की सप्लाई कर रहा था। पुलिस के अनुसार, बरामद खेप में बड़ी मात्रा में कैप्सूल, टैबलेट और इंजेक्शन शामिल थे, जिनका उपयोग नशे के लिए किया जाता है। आरोप है कि तस्कर भारत-नेपाल सीमा के आसपास के इलाकों के अलावा नेपाल के प्रमुख शहरों तक भी इन प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति करते थे।

नेपाल के युवाओं में बढ़ रही नशीले टैबलेट की लत

जानकारों के अनुसार, नेपाल में शराब अपेक्षाकृत महंगी होने के कारण बड़ी संख्या में युवा नशीले टैबलेट और इंजेक्शनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेष रूप से छात्र वर्ग में ऐसे नशे का प्रचलन बढ़ने की बात सामने आ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि शराब के सेवन की पहचान आसानी से हो जाती है, जबकि नशीली दवाओं का उपयोग अपेक्षाकृत छिपकर किया जा सकता है। यही कारण है कि कुछ युवा इन दवाओं का सेवन करने लगे हैं।
भैरहवा के चिकित्सक डॉ. अमृत थापा ने बताया कि बेरोजगारी, आसानी से उपलब्धता और कम कीमत भी युवाओं को नशीली दवाओं की ओर धकेलने के प्रमुख कारण हैं। इस प्रकार के नशे से घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट, सामाजिक अस्थिरता और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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20 गुना तक काली कमाई करते हैं धंधेबाज

भारत में कम कीमत पर उपलब्ध कुछ प्रतिबंधित इंजेक्शन नेपाल पहुंचते-पहुंचते कई गुना महंगे हो जाते हैं। यही भारी मुनाफा सीमावर्ती क्षेत्रों में इन दवाओं की तस्करी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत में 15 से 20 रुपये प्रति एंपुल में मिलने वाले डायजेपाम, बुप्रेनोर्फिन और फेनरगन इंजेक्शन नेपाल में 400 से 500 रुपये प्रति एंपुल तक बेचे जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा का फायदा उठाकर तस्कर सीमावर्ती पगडंडियों और अनधिकृत रास्तों से इन दवाओं की खेप नेपाल पहुंचाते हैं। इस नेटवर्क में कैरियरों और स्थानीय एजेंटों की अहम भूमिका होती है। सीमावर्ती इलाकों से दवाएं एकत्र कर उन्हें छोटे-छोटे पैकेटों में बांटकर नेपाल के विभिन्न शहरों तक पहुंचाया जाता है, जहां इनकी ऊंची कीमत वसूली जाती है।
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