निचलौल। शहर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मुख्य चिकित्साधिकारी ने बुधवार की रात करीब साढ़े सात बजे निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की पोल खुल गई। अस्पताल में चारों तरफ खामियां देखने को मिलीं। उन्होंने अस्पताल के अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगते हुए ड्यूटी में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही की लगातार शिकायत मिल रही थी। शिकायत पर निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते अस्पताल में चारों तरफ खामियां देखने को मिली। निरीक्षण में पाया गया कि जिम्मेदारों की ओर से ओपीडी बंद किया गया था। केवल इमरजेंसी चल रही थी।
वह भी बेहतर अवस्था में नहीं थी, क्योंकि सुबह से महज 26 मरीजों का रजिस्टर में इंट्री किया गया था। इतना ही नहीं जिम्मेदारों ने इमरजेंसी में ड्यूटी के लिए डॉक्टर, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय की 24 घंटों का रोस्टर लगाया था। जबकि नियम के मुताबिक इमरजेंसी ड्यूटी में आठ घंटे का ड्यूटी लगता है। ड्यूटी से कर्मचारी भी नदारद रहे। अस्पताल में दवा का स्टॉक सहित अन्य बिंदुओं की जानकारी ली गई।
उसके बाद महिला प्रसूता अस्पताल का निरीक्षण किया गया। जहां पर लेबर रूम में देखा गया, की प्रसव के दौरान सामाग्री में कमी है।
फिर लेबर रूम में जल्द पूरी सामाग्री रखने के लिए चेतावनी दी गई। उसके बाद इमरजेंसी दवाओं को देखा गया। जो मौके पर मौजूद थी। यहां में स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी से नदारद रहे। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह से स्पष्टीकरण मांगा गया है, जबकि ड्यूटी रजिस्टर के दौरान नदारद स्वास्थ्य कर्मियों को लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की नसीहत दी गई। ी
भमोरा। फाईल फोटो अंजली- फोटो : mathura