अद्भुत, अकल्पनीय, अवर्णनीय। पौ फटने के साथ संगम की रेती पर हर तरफ बस सिर ही सिर। इतनी भीड़। न कोई आह्वान, न घोषणा, न ही कोई प्रचार या पोस्टर। पंचांग के एक कोने में कुंभ या महाकुंभ लिखे होने के आधार मात्र पर इस जनसमुद्र का जुटना अचंभे में डालता है। चर्चा है कि 10 फरवरी को इससे चार गुनी भीड़ जुटेगी। आखिर कौन सी विद्युत तरंग मन को उद्वेलित कर देती है कि वह खिंचा सा चला आया। अस्मिता की पहचान, खुद से जुड़ने की लालसा या फिर आस्था?
हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ तमाम अखाड़ों के साधू-संतों का जुलूस। गंगा के दुग्धाभिषेक के साथ नागा साधुओं का छपाक-छपाक। कौतुक भरा शाही स्नान। धूनी लपेटे साधुओं के अजब-गजब करतब। शाही स्नान का सिलसिला बढ़ता है जो दिन भर चलता है। यह बात अलग है कि गृहस्थों ने भोर से ही डुबकियां लगाना प्रारंभ कर दिया था।
'गंगा मइया हमका सरग देखइहें'
बलिया की सीता और सुरेश की शादी तीन महीने पहले हुई है। सिदुंर, बिंदी और महावर लगाकर आई सीता शरमाते हुए कहती हैं कि बड़े भाग से कुंभ स्नान का मौका मिला है। पटना से आई सुमित्रा देवी कह रहीं थीं, ‘12 बजकर 2 मिनट पर नहान भवा हय। अब हम तव चैन से मरब। गंगा मइया हमका सरग देखइहें।' 72 साल के झूंसी के रामजियावन यादव बताते हैं कि ‘जब से होश संभारा है कउनो कुंभ नहीं छोड़ा। पता नाहीं अगिला कुंभ मिलय न मिलय। सुनित हंय अइसन संजोग बहुत बरस साल बाद आवा है। अब परलोक सुधरि जाई।'
कुंभ में विदेशी भी शामिल
दुनिया के चांद पर जाने को तैयार इस दौर में मात्र गंगा में डुबकी मात्र से मोक्ष की आस पर इतरा भी सकते हैं, मुस्करा भी। पर इस सच से मुंह मोड़ नहीं सकते कि समाज का बड़ा हिस्सा इस आस्था से अनुप्राणित है कि मात्र कुंभ स्नान से वह मोक्ष के अधिकारी हो जाएंगे। दिलचस्प तो यह भी है कि इस जमावड़े में विदेशी भी शामिल हैं।
महेशानंद गिरि के जुलूस में पखावज बजाते विदेशी भक्तों की भीड़ रोमांचित करती है। कैलीफोर्निया से आई पेंटर सेरेन तो अचंभित है। रात 11 बजे संगम किनारे मिलती हैं तो उछल पड़ती हैं। कहती हैं, ‘इट्स स्ट्रेंज, मेस्मराइजिंग एंड बियांड इमैजिनेशन। कम सैचुरेट योरसेल्फ इन महाकुंभ, इफ यू डिजायर टू फील द सोल आफ इंडिया।'
साइको सेक्सोलाजिस्ट से लेकर पिज्जॉ, बरगर तक
भीड़ तो किसी और कारण से उमड़ी है, पर इस हिन्दू जनसमुद्र का फायदा लेने वालों की कमी नहीं। अखिलेश सरकार की उपलब्धियों का स्क्रीन प्ले हो रहा है तो साइको सेक्सोलाजिस्ट डॉ. वीके कश्यप की होर्डिंग पर भी लोगों की नजर पड़ती है। सोनिया गांधी से लेकर मुलायम सिंह यादव के आने की चर्चा है। केसर और शिलाजीत बेचने वालों की कमी नहीं है। डॉमिनोज का पिज्जॉ, बरगर भी है, चाउमीन से लेकर दोसा तक उपलब्ध है। कानपुर का विवेक तो चित्रकूट से कंद ले आया है। कहता है कि रामजी ने 14 साल तक वनवास के दौरान यही खाया। आप भी खाइए। लोग श्रद्धाभाव से उसका प्रसाद खरीद रहे हैं।
कहीं भागवत तो कहीं रामचरित मानस का पाठ
पंडालों पर कहीं भागवत पाठ होना है कहीं रामचरित मानस। कहीं किसी संत का प्रवचन है तो कहीं कुछ और। शास्त्री पुल से नीचे देखें तो दूर तक जहां तक नजर जाती है, रोशनी का इक नया शहर दिखता है। यह भीड़, आस्था कह रही है कि कुंभ से बेगाने रहकर देश से संवाद और उसको जानना संभव नहीं। बेगानापन आपको अपने देश में अजनबी बना देगा।