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यूपी में खत्म होता माफिया राज: विकास दुबे से अतीक और मुख्तार तक, कैसे एक के बाद एक कुख्यात अपराधी हो रहे ढेर

Fri, 29 Mar 2024 01:34 PM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा

सार

UP Mafia Mukhtar Ansari News: उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक कुख्यात अपराधी, माफिया या डॉन का खात्मा हो रहा है। मुख्तार अंसारी की बीती रात मौत हो गई। जिसके बाद पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू करने के साथ ही अलर्ट जारी कर दिया है।
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मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Mafia Mukhtar Ansari Death: उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। मुख्तार की मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी  कर दिया है वहीं एक साल पहले ही माफिया अतीक अहमद की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी। कई जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है। बीते पांच सालों में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें किसी की हत्या हो गई, कोई मुठभेड़ में ढेर हो गया तो कई बीमारी की वजह से मर गया। पश्चिमी यूपी के अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की भी बीते दिनों गोली मारकर हत्या कर दी गई। जानें कैसे खत्म हो रहा माफियाओं का राज....

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अतीक-अशरफ की सरेआम हत्या
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े माफियाओं में से एक अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को रिमांड में लेकर यूपी एसआईटी पूछताछ कर रही थी। नियम के मुताबिक हर रोज दोनों का मेडिकल भी होता था। 15 अप्रैल की रात भी मेडिकल कराने के लिए पुलिस की टीम दोनों को लेकर अस्पताल पहुंची। यहां पहले से मौजूद मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। अतीक और असर मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस बीच, मीडियाकर्मी बनकर पहुंचे तीन हमलावरों ने दोनों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। एक के बाद एक कई राउंड फायरिंग की और मौत के घाट उतार दिया। 

कुख्यात बदमाश विकास दुबे का एनकाउंटर
तीन जुलाई 2020 को कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस की टीम कुख्यात बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई। इसी बीच विकास दुबे और उसगे गुर्गों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। विकास दुबे और उसके गुर्गे फरार हो गए। पुलिस ने विकास के तीन सहयोगियों का एक के बाद एक एनकाउंटर किया। इसके बाद विकास दुबे को नौ जुलाई 2020 को उज्जैन महाकाल से गिरफ्तार कर लिया गया। यूपी की पुलिस उसे वापस कानपुर ला रही थी। इस बीच, गाड़ी पलट गई। पुलिस के मुताबिक, विकास दुबे ने पुलिसकर्मी का बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की। इसी बीच, पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया। 

संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की गोली मारकर हत्या
लखनऊ के सिविल कोर्ट में पश्चिमी यूपी के अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की बुधवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने एक बार फिर से अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की चर्चा छेड़ दी है। ऐसा नहीं है कि केवल इन्हीं तीनों बदमाश का ऐसा हश्र हुआ है। पिछले पांच साल में यूपी के अंदर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कुख्यात अपराधियों की न्यायिक हिरासत में हत्या हो गई। आज हम ऐसे ही पांच कुख्यात अपराधियों की कहानी बताएंगे। 

मुन्ना बजरंगी की जेल में मौत
मुन्ना बजरंगी के नाम से एक समय पूरा यूपी कांपता था। लेकिन इस माफिया का अंत भी उसी तरह हुआ। मुन्ना को 2018 में बागपत जेल के अंदर गोलियों से भून दिया गया था। मुन्ना का पूरा नाम प्रेम प्रकाश सिंह था। मुन्ना बजरंगी का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दबदबा बनाया। 

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। पूर्व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी मुन्ना बजरंगी का नाम था।  इस हत्याकांड के बाद से ही मुन्ना मोस्ट वॉन्टेड बन गया था।  29 अक्तूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा था। 2018 में उसे झांसी से बागपत जेल में शिफ्ट किया गया, जहां उसी साल जेल में ही गोलियों से भूनकर हत्या हो गई।  

जेल में मुख्तार के करीबी को मार डाला
मई 2021 की बात है। चित्रकूट जेल में कई कुख्यात बदमाश बंद थे। इन्हीं में बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी का करीबी मेराज और पश्चिमी यूपी का गैंगस्टर मुकीम काला भी था। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद मेराज ही मुख्तार का सबसे खास आदमी था। 2021 में मेराज-मुकीम के ही जेल में गैंगस्टर अंशु दीक्षित बंद था। अंशु ने मौका मिलते ही मेराज और मुकीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। गैंगवार हुआ। मेराज और मुकीम की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने अंशु दीक्षित का भी जेल के अंदर ही एनकाउंटर कर दिया।   
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यूपी के माफियाओं की क्राइम फाइल के आंकड़े
जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2017 से अब तक कुल 10,720 एनकाउंटर हो चुके हैं। इनमें अतीक अहमद के बेटे असद अहमद, उसके गुर्गे गुलाम, अरबाज और उस्मान चौधरी जैसे 190 बदमाश ढेर हो चुके हैं। पिछले छह साल की बात करें तो बीते वर्ष पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ का आंकड़ा सबसे कम रहा है। 

पांच साल का रिकॉर्ड
साल 2018 में सर्वाधिक 41 अपराधी मारे गए
साल 2017 में 28
साल 2019 में 34
साल 2020 में 26 
साल 2021 में 26
साल 2022 में 14
साल 2023 में अब तक 11 बदमाश मारे गए हैं। 

बीते छह वर्ष में पुलिस मुठभेड़ में 23 हजार से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। एनकाउंटर के दौरान 12 पुलिसकर्मी शहीद और 1400 घायल हुए हैं।
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