तहसीलों, व्यापारकर या आयकर जैसे विभागों में छोटे-मोटे काम कराने वाले या रजिस्ट्री कराने वाले अब वकील नहीं रह जाएंगे। वजह है बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का पंजीकरण नवीकरण का नया फार्मूला।
काउंसिल ने सभी वकीलों के लिए पंजीकरण का नवीनीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है।
नवीनीकरण के लिए अधिवक्ता को पिछले पांच वर्षों में किए गए कम से कम पांच मुकदमों की लिस्ट, हलफनामा और 400 रुपये नवीकरण शुल्क देना होगा।
मालूम हो कि मुकदमे में वकालतनामा लगाने के अलावा ढेरों ऐसे काम हैं जहां वकालतनामा नहीं लगता है।
मसलन तहसीलों में दाखिल-खारिज कराना हो, मकान या जमीन की रजिस्ट्री, लाइसेंस बनवाना, विवाह पंजीकरण, आय या जाति प्रमाणपत्र बनवाना आदि।
इसके अतिरिक्त वाणिज्यकर, आयकर विभागों, श्रम न्यायालय, परिवार न्यायालय, परिवहन कार्यालय या उपनिबंधक कार्यालय आदि में वकालतनामा नहीं लगता है। ऐसे वकीलों की संख्या काफी बड़ी है जो यही काम करके आजीविका अर्जित करते हैं। काउंसिल के इस नियम से तमाम अधिवक्ता परेशान हैं।