ललितपुर। विश्व संस्कृत दिवस में रविवार को संस्कृत भारती कानपुर प्रांत के प्रांतीय उपाध्यक्ष और संस्कृत विभागाध्यक्ष नेहरू महाविद्यालय के प्रो. डॉ. ओम प्रकाश शास्त्री ने गोष्ठी में संस्कृत का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत के महत्व और संस्कृृत की देश में पहचान के बारे में कहा कि संस्कृति का अर्थ है परिमार्जित संस्कारों से युक्त मनुष्यों की सभ्यता। हमारी आत्मा, हमारी अस्मिता, भारत की भारतीयता उसकी संस्कृति में है, जिसका प्राण संस्कृत भाषा है। संस्कृति व्यक्ति के विकास के साथ-साथ आंतरिक विकास की भी बोधक होती है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि भारतीय संस्कृति का आधार संस्कृत साहित्य है। संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि संस्कारित भाषा है। इसलिए इसका नाम संस्कृत है। संस्कृत भाषा अन्य भाषाओं की तरह केवल अभिव्यक्ति का साधन मात्र ही नहीं है अपितु वह मनुष्य के सर्वाधिक संपूर्ण विकास की कुंजी भी है। भाषा संस्कृति की वाहिका होती है। भारतीय संस्कृति के सभी पक्षों जैसे ऐतिहासिक, आर्थिक, धार्मिक, प्राकृतिक, राजनीतिक तथा कला, ज्ञान विज्ञान आदि का सूक्ष्म तथा वास्तविक ज्ञान संस्कृत भाषा के माध्यम से ही हो सकता है।
संस्कृत भाषा भारत की सांस्कृतिक एकता को बनाये रखने वाली सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है, जिस पर राजनीतिक एकता भी निर्भर है। आधुनिक भारतीय भाषाओं के हित में संस्कृत का संरक्षण व संवर्धन व विकास अत्यंत आवश्यक है। संस्कृत भाषा का साहित्य विश्व का सबसे प्राचीन और समृद्ध साहित्य है यह न केवल भारत को एक सूत्र में पिरोता है अपितु संपूर्ण विश्व को मानवता की शिक्षा देता है। भारत विश्व का प्राचीन राष्ट्र होने के कारण ज्ञान विज्ञान का आदि राष्ट्र है। आज विश्व में विविध प्रकार के ज्ञान विज्ञान की जो चमक दिखाई देती है उसके बीज भारत से ही दुनिया भर में गये इसी लिए भारत को विश्व गुरु कहा जाता था। एक से नौ तक के अंक, शून्य और दशमलव की पद्धति इन सबका आविष्कार भारत में ही हुआ। बीजगणित का विकास भारत में हुआ और और पूरे विश्व में पहुंचा। संस्कृत भाषा से ही विश्व की अनेक भाषाओं की उत्पत्ति हुई है। विश्व की अधिकांश भाषाओं में संस्कृत भाषा के शब्द मिश्रित हैं जो उनके व्यवहारिक प्रयोग को सरल करने में सहायक हैं।
उन्होंने कहा कि देश के योगदान में संस्कृत की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। आधुनिक समय में विज्ञान के जिन आविष्कारों को हम देख रहे हैं उसे प्राचीन समय के हमारे मनीषियों ने करके दिखा दिया था। संसार की अनेक प्राचीन सभ्यतायें धूल धूसरित हो चुकी है, किंतु संस्कृत भाषा की वजह से भारतीय संस्कृति आज भी अपने स्थान पर अविचल खड़ी है। सारे संसार में भारतीय संस्कृति की अजेय पताका फहरा रही है।