हरि तालिका तीज व पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विराजमान होने से समूचा नगर धर्ममय हो गया। व्रती महिलाएं सुबह से भजन कीर्तन में लीन रही। वहीं, नौजवान गणपति प्रतिमाओं को पंडालों में विराजमान कराने में व्यस्त रहे।
बृहस्पतिवार को हरितालिका तीज होने के कारण सौभाग्यवती महिलाएं इस व्रत को रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं। अगले दिन गणेश चतुर्थी पर ब्रह्ममुहुर्त में पूजन सामग्री को तालाब पर विसर्जन के उपरांत अपना व्रत तोड़ती हैं। देर रात्रि तक जहां घरों व मंदिरों में हरितालिका तीज पर झांकियां सजाई गई। वहीं, संगीतमय भजन कीर्तन का दौर चला।
वहीं, पंडालों में गणेश प्रतिमाओं को विराजमान किया गया। इस दौरान समिति के सदस्यों द्वारा प्रतिमाओं को वाहनों के माध्यम से पंडालों में ले जाया गया। समिति के सदस्य गणेशपति बप्पा मौरया के जयघोष लगाते हुए विभिन्न रास्तों से निकले। मुहल्ला चौबयाना, कटरा बाजार, महावीरपुरा सहित विभिन्न मुहल्लों में गणेश प्रतिमाएं रखी गई। शुक्रवार को सुबह पंडालों में प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा वैदिक रीति रिवाज के साथ की जाएगी। इसके बाद भगवान की आरती होगी। इस तरह दस दिनों तक पंडालों में हलचल बनी रहेगी। उधर, डा. ओमप्रकाश शास्त्री का कहना है कि गणेश चतुर्थी को गणेश जी का प्राकट्य हुआ था। इसकी प्रतिष्ठा के लिए सुबह आठ बजे से सुबह ग्यारह बजे तक रहेगा जो फलदायी होगा। इस दिन लोग उपवास भी रखते हैं। हरितालिका तीज व्रत वैदिक व्रत है। इस व्रत पर शिव, पार्वती की पूजा की जाती है। मां पार्वती ने इस व्रत को रखा था, उसके अगले दिन गणेश जी प्रकट हुए थे। शिवपुराण में इसका वर्णन है। महिलाएं पति की दीर्घायु और पुत्र की कामना के लिए यह व्रत करती हैं।