कैप्सन - दल दल बना प्राईमरी विघालय का रास्ता
- फोटो : TALDEHATE
तालबेहट/बिजरौठा। शासन के निर्देश पर गांव-गांव में सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प कराकर उन्हें खूबसूरत रूप देने का काम चल रहा है लेकिन कुछ विद्यालयों में जाने के लिए अब तक रास्ता तक मुहैया नहीं हो सका। वर्तमान में बिजरौठा के प्राइमरी विद्यालय के छोटे-छोटे छात्रों को अपनी जान जोखिम में डाल कर स्कूल जाना पड़ रहा है। यहां मामूली सी बारिश में ही रास्ता दलदल बन जाता है।
सन 1901 में बिजरौठा के किले में क्षेत्र के बच्चों को प्राइमरी शिक्षा मुहैया कराने के लिए प्राइमरी विद्यालय खोला गया। इसके बाद खंडहर होते किले के समीप सन 1984 में शासन ने नए भवन का निर्माण कराया। विद्यालय में आसपास के बच्चे पढ़ने गए। धीरे-धीरे ग्राम पंचायत के अन्य मजरों और आसपास के गांवों में विद्यालय खोले जाने से उक्त विद्यालय में छात्रों की संख्या गिर गई। वहीं ग्रामीणों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मोह कम हो गया।
आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय होने के बाद भी इस विद्यालय तक जाने का रास्ता नहीं बन सका। आज भी गांव के छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल कर एक गहरे कुएं के समीप से विद्यालय जाते हैं। मामूली बारिश में पूरा रास्ता दलदल बन जाता है। इससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।
- विद्यालय को रास्ता बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया है। इस बार जिला पंचायत के जरिए रास्ते का निर्माण कराने का प्रयास किया जाएगा।
- डॉ. सत्येन्द्र बुंदेला
गांव के बच्चे बरसात में काफी परेशानी का सामना कर विद्यालय जाते है। एक ओर कुआं और दूसरी ओर नाला पार करना पड़ता है। इससे बच्चों की जान जोखिम में बनी रहती है।
- रवि कुशवाहा
53 विद्यार्थी हैं नामांकित
इस विद्यालय में कुल 53 विद्यार्थी पढ़ते है। कक्षा एक में मात्र चार, दो में नौ तीन में ग्यारह, चार में अठारह और पांच में ग्यारह छात्रों को मिलाकर मात्र 53 विद्यार्थी हैं। जिनको पढ़ाने के लिए मात्र एक अध्यापक और एक शिक्षामित्र है।
कैप्सन - दल दल बना प्राईमरी विघालय का रास्ता- फोटो : TALDEHATE