ललितपुर। जैन धर्मावलंबियों के महापर्व पर्यूषण संत आचार्य निर्भयसागर के ससंघ सानिध्य में प्रारंभ हुआ। जैन मंदिरों में श्रावकों ने पूजन अर्चन किया।
धर्मसभा में आचार्य ने पर्यूषण पर्व को त्याग और संयम का पर्व बताते हुए कहा कि इसके प्रारंभ में हमें अपने आप को अधिक से अधिक समय प्रभु आराधना से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि अपने शरीर और आत्मा को स्वस्थ रखने के लिए क्रोध को जीतकर क्षमा को जानना होगा। क्षमा का अभाव क्रोध है, पर कहा यह जाता है कि क्रोध का अभाव क्षमा। उन्होंने कहा कि क्षमा को जानने से पूर्व क्रोध को जानना और समझना आवश्यक है। क्योंकि जब तक हम क्रोध को नहीं समझेंगे तब तक क्षमा को नहीं समझ सकेंगे।
जैन अटामंदिर में आचार्य श्री के सानिध्य में बृहस्पतिवार सुबह से ही ध्यान साधना का श्रावकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके उपरांत प्रभु अभिषेक शांतिधारा एवं सामूहिक पूजन का आयोजन किया गया है। आचार्य ससंघ के सानिध्य में विराजित संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर, मुनि सुदत्तसागर, मुनि भूदत्त सागर, मूनि पद्मदत्त सागर, मुनि बृषभदत्त सागर,क्षुल्लक चंद्रसागर, क्षुल्लक श्रीदत्त सागर नगर के जैन अतिशय क्षेत्र अभिनंदनोदय तीर्थ, आदिनाथ मंदिर गांधीनगर, वाहूवलि नगर, जैन मंदिर आदिनाथ बड़ा मंदिर, चंद्रप्रभु मंदिर डोढ़ाघाट, शांतिनगर जैन मंदिर गांधीनगर, इलाइट जैन मंदिर सिविल लाइन, जैन मंदिर, पारसनाथ कॉलौनी, ज्ञानोदय तीर्थ में पर्यूषण पर्व पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।