बच्चों ने लिया स्वदेशी दीप जलाने का संकल्प।
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ललितपुर। दयोदय अहिंसा अभियान द्वारा दीपावली के महापर्व पर पटाखों से हो रहे ध्वनि, वायु और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर बच्चों को जागरूक किया जा रहा है। पटाखों से हो रहे दुष्परिणाम पर आधारित पोस्टर प्रकाशित करके जन- जागरूकता फैलाई जा रही है। अभियान से प्रेरित होकर बच्चों ने कहा कि दीपावली के पर्व पर स्वदेशी दीपोत्सव करके खुशियों के पर्व को हर्ष व उत्साह से मनाएंगे। कहा कि किसी भी धर्म ग्रंथों में यह नहीं लिखा है कि पलभर की खुशी के लिए किसी भी प्राणी की हिंसा की जाए।
दयोदय अहिंसा अभियान से प्रेरणा पाकर बच्चों के मन की भावनाएं बदल रही हैं। बच्चे संकल्प ले रहे हैं कि वह दीपावली के पर्व पर आतिशबाजी का प्रयोग नहीं करेंगे और दूसरे बच्चों को भी प्रेरित करेंगे। दयोदय अहिंसा अभियान से जुडे़ पुष्पेंद्र जैन बताते हैं कि कोविड-19 के चलते राजस्थान सरकार ने पटाखों और आतिशबाजी पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। दीपावली के पर्व पर पटाखों से हो रहे दुष्परिणाम को बताया गया तो बच्चों ने कहा कि हम दीपावली के पर्व पर दीपोत्सव करके खुशियां मनायेंगे और स्वदेशी मिट्टी से निर्मित दीपक जलाकर घरों को दीपक की रोशनी से जगमगाएंगे। मुस्कान पटेल ने कहा कि दीपोत्सव के महापर्व पर पटाखों को भूलकर खुशहाली के साथ घी के स्वदेशी दीपक जलाएंगे। पावनी सोनी ने कहा कि दीपावली पर उन गरीब, बेसहारा, असहाय लोगों की सहायता करें जिनके लिए एक वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है। चेष्टा कुशवाहा का मानना है कि पटाखों में विषैली गैस होने के कारण सूक्ष्म जीवों की मृत्यु हो जाती है तो हम इस पर्व को अहिंसा के पर्व के रूप में मनाएं। देवांश जैन का कहना है कि दीपावली का महापर्व ऐसा पर्व है जिसे लोग हर्षोल्लास पूर्वक मनाते हैं। शिवम यादव का कहना है कि पटाखों को न फोड़े क्योंकि इससे हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है। हर्ष जैन का कहना है कि चीनी सामग्री, लाइट, झालर, दीपक आदि का बहिष्कार कर हम स्वदेशी दीपावली मनाएं।