प्रो. ओम प्रकाश शास्त्री।
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ललितपुर। भारतीय संस्कृति में ग्रह, नक्षत्र और राशियों का मानवीय जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। पुष्य रवि नक्षत्र का योग किसी भी शुभ मुहूर्त से बढ़कर माना जाता है। यह प्रत्येक 27 दिन में एक बार 24 घंटे के लिए आता है। इस बार यह सात नवंबर को है, जो रविवार की सुबह तक रहेगा। इस शुभ समय में खरीरादी करने से स्थाई लाभ मिलता है। ज्योतिषविदों के अनुसार यह सभी के लिए शुभ फलदायी होता है।
नेहरू महाविद्यालय के प्रो. ओमप्रकाश शास्त्री का कहना है कि 27 नक्षत्रों के अलग- अलग देवता होते हैं। नक्षत्र मंडल में पुष्य नक्षत्र का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि यह कर्क राशि को स्पर्श करता है, जिसका स्वामी चंद्रमा व्यापारिक ग्रह है। पुष्य नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है, जो बुद्धि के देवता हैं। इसलिए हमारे देश में पुष्य नक्षत्र में व्यापार शुभारंभ, वाहन, घर, गृह प्रवेश, आभूषण आदि खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह नक्षत्र शनिवार सात नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त में तड़के चार बजकर 26 मिनट पर प्रारंभ होकर आठ नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त के समय चार बजकर 26 मिनट तक रहेगा। हर वर्ष दीपावली के पूर्व आने वाले पुष्य नक्षत्र का बुंदेलखंड क्षेत्र में आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्व है, क्योंकि ओरछा में विराजमान भगवान श्री रामराजा को महारानी गणेश कुंवर अयोध्या से पुष्य नक्षत्र में पैदल चलकर लाई थीं और उन्हें विराजमान किया था। तभी से बुंदेलखंडवासी पुष्य नक्षत्र को श्रेष्ठतम मुहूर्त मानते हैं।