ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि जहां लेन-देन होता है। जिसको दिया है उससे लिया है यह संसार की रीति है। हमने विचार किया कि जिस वस्तु से हमें सब कुछ मिलता है उसको क्या दिया। वनस्पति, अग्नि, वायु, जल,पृथ्वी हमारे जीवन के लिए अमूल्य हैं। हमने इनके लिए क्या दिया?
मुनि श्री ने कहा वनस्पति फल सब्जी जीवनदायिनी हैं। अपने घरों में साज सज्जा के लिए लकड़ी का उपयोग करते हैं। वही वनस्पति देने वाले पेड़ों की अंधाधुंध कटान में लगे हैं। जरूरत है प्रत्येक व्यक्ति कम से कम पांच पौधे जीवन में लगाए और उनकी देखभाल बच्चों की तरह करे। तभी हम इसके उपकार को चुका सकते हैं। प्रकृति तुम पर उपकार करती है तुम प्रकृति पर करो। जीवन में पानी की उपयोगिता और उसके बदले जल की बर्बादी पर मुनिश्री ने कहा कि जल हर दृष्टि से उपयोगी है। इसको बर्बाद होने से बचाना चाहिए। जल की शुद्धि और इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए इसका प्रयोग प्रभु के अभिषेक में करें तभी जीवन की सार्थकता रहेगी।
सुबह क्षेत्रपाल मंदिर मूलनायक वेदी पर शांतिधारा सीमा जैन, सुभाष चंद जैन जयपुर परिवार, राजीव कुमार, रवींद्र कुमार लागौन परिवार, विनोद कुमार, सुबोध जैन परिवार ने की। धर्मसभा में पाद प्रक्षालन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर पुर्ण्याजक परिवार एवं श्राविकाओं ने मुनि श्री को शास्त्र भेंट किया। मुनि सुधासागर महाराज की आहार चर्या का सौभाग्य शैलेंद्र जैन पिंटू परिवार को मिला जबकि पूज्य सागर महाराज की आहार चर्या अशर्फी देवी, अविनाश बुखारिया को मिला। ऐलक धैर्यसागर महाराज को निधी जैन, प्रदीप जैन एवं गंभीर सागर महाराज को आहार दान का सौभाग्य अजित जैन बरेली परिवार को मिला। धर्मसभा का संचालन महामंत्री डॉ.अक्षय टडैया ने किया। इस मौके पर क्षेत्रपाल मंदिर प्रबंधक राजेंद्र जैन, सभासद मोदी पंकज जैन,जिनेंद्र जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, शीलचंद, कोमल, नरेंद्र जैन, छोटे पहलवान, सनत मलैया, जिनेंद्र जैन, संजीव जैन, डॉ.सुनील जैन संचय, विजय जैन, महेंद्र जैन, मुन्नालाल, सुधीर सेवनी, आनंद जैन, नरेंद्र राजश्री, शिक्षक पुष्पेंद्र जैन मौजूद रहे।