ललितपुर। जैन समाज का पर्यूषण पर्व शुक्रवार से शुरू हो गया। पहले दिन जैन मंदिरों में श्रावक-श्राविकाओें ने उत्तम क्षमा धर्म का पूजन किया। इस दौरान आर्यिका आदर्शमति माताजी ने क्षमा धर्म के महत्व के बारे में लोगों को बताया।
आर्यिकारत्न आदर्शमति माता जी ने धर्म की आराधना को संसार में श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि इसी से व्यक्ति का जीवन सुखी और समृद्ध होता है। उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व पर हम सभी साधना करते हुए चिंतन मनन करते हैं कि महामुनीश्वर अपने जीवन में कैसे इन धर्मों का पालन कर अपने जीवन को मंगलमय बनाते हुए कर्मों की निर्जरा के माध्यम से मुक्ति को प्राप्त करते हैं।
क्षेत्रपाल मंदिर परिसर में विराजमान आर्यिकारत्न आदर्शमति माता जी के सानिध्य में तत्वार्थ सूत्र का वाचन नरेंद्र शास्त्री एवं सुनील शास्त्री ने किया। अर्घ्य समर्पण रामप्रकाश संजीव जैन ममता स्पोर्ट द्वारा किया गया। जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल ने आर्यिका श्री को श्रीफल अर्पित कर आर्शीवाद लिया। जैन अटा मंदिर में आर्यिका दुर्लभमति माता ने उत्तम क्षमा धर्म को श्रेयस्कर बताया। उन्होंने कहा क्रोध अज्ञानता से शुरू होता है और पश्चाताप पर जाकर खत्म होता है। इधर, दिगंबर जैन पार्श्वनाथ नया मंदिर में आर्यिकारत्न अनर्गमति माता ने सहनशीलता का धर्म जीवन में धारण करने की प्रेरणा दी।
धर्मसभा में आचार्यश्री के चित्र का अनावरण चंद्रप्रभु महिला मंडल एवं पूर्णमति सेवा संघ द्वारा किया गया। जैन बड़ा मंदिर में आर्यिका श्वेतमति एवं विदेहमति माता ने क्रोध को अग्नि की उपमा देते हुए उसे शांत करने के लिए क्षमा जल को ही समर्थ बताया। चंद्रप्रभु मंदिर, आदिनाथ मंदिर बाहुबली नगर समेत विभिन्न मंदिरों में आर्यिका संघ के माध्यम से पर्यूषण पर्व पर आराधना हुई। जैन पंचायत के महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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आत्मशुद्धि का पर्व है दशलक्षण: आर्यिका विज्ञान मती माता
महरौनी। आर्यिकारत्न विज्ञान मती ससंघ के सानिध्य में प्रात: भगवान जिनेंद्र का अभिषेक और संसार के सभी जीवों की कल्याण की भावना को लेकर शांतिधारा की गई।
आचार्य विद्यासागर सभागार में आयोजित संस्कार शिविर में प्रथम अभिषेक राजकुमार बजाज व अध्यक्ष कोमल चंद्र सिंघई और शांति धारा कांतिलाल राजस्थान एवं महामंत्री प्रमोद सिंघई ने की। आर्यिका रत्न विज्ञान मती माताजी ने कहा कि आत्मा को पवित्र करने वाला ही पर्व कहलाता है। पर्यूषण आत्म-शोधन एवं आत्म-शुद्धि का पावन पर्व है। वहीं सर्वतोभद्र अतिशय तीर्थ क्षेत्र, शांतिनाथ जिनालय, चंदप्रभु जिनालय में भी पर्यूषण पर्व पर पूजन अभिषेक किया गया। इस अवसर पर इंदौर आश्रम से पधारी ब्रह्मचारिणी शशी दीदी ने प्रवचन किए।
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जिसके मन में क्षमादान देने का गुण हो उसका कोई शत्रु नहीं हो सकता
मड़ावरा। इंदौर आश्रम से पधारी ब्रह्मचारिणी शशी दीदी ने कहा कि जिसके मन में क्षमादान देने का गुण हो संसार मे उसका कोई भी शत्रु नहीं हो सकता। संघस्थ आर्यिका संघ के सानिध्य में पर्यूषण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर महावीर विद्याविहार में शांतिधारा चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ राकेश जैन सिंघई, सुधीर सिंघई, डॉक्टर नितिन जैन, सुलभ जैन, डॉक्टर समकितजैन, राजकुमार जैन, शैलेष जैन, रीतेश जैन, मनोज जैन, घनश्यामदास जैन, अभिषेक जैन ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप जैन ख़ुटगुवां, धर्मेंद्र जैन सराफ, प्रदीप जैन, प्रदीप जैन सिंघई द्वारा संयुक्त रुप से किया गया। संवाद
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300 वर्ष पुराने मंदिर में विराजित चंद्रप्रभु की महिमा न्यारी
जाखलौन। जाखलौन कस्बे में स्थित दिगंबर जैन मंदिर चंदा प्रभु जिनालय करीब 300 वर्ष पुराना है। समस्त जैन समाज द्वारा पर्यूषण पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिर में महिलाएं और पुरुष पूजा याचना में मग्न हैं। संवाद
श्री क्षेत्रपाल मंदिर में प्रवचन करती आर्यिका माता जी- फोटो : LALITPUR