ललितपुर। मानव आर्गेनाइजेशन द्वारा शनिवार को महावीर वन्य विहार देवगढ़ में अंतरराष्ट्रीय गिद्ध दिवस मनाया गया। इसमें गिद्ध की प्रजातियों एवं उनके विलुप्त होने के कारणों को बताते हुए उनके संरक्षण पर चर्चा की गई। इसमें बताया गया कि बुंदेलखंड में तकरीबन तीन हजार गिद्ध उड़ान भर रहे हैं।
सितंबर के प्रथम शनिवार को अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बुंदेलखंड में करीब तीन हजार गिद्ध उड़ान भर रहे हैं। वन जीव विहार के वन दरोगा शिवम यादव ने बताया कि गिद्धों के लिए एक ही स्थान पर भोजन की व्यवस्था करने के लिए विभाग द्वारा ललितपुर के देवगढ़ में वल्चर रेस्टोरेंट खोला गया। वर्ष 2011 में इसका शुभारंभ हुआ। इसमें पशुपालकों के मृत पशुओं को रखा जाता है, जिससे गिद्धों को भोजन खोजने में परेशानी न हो।
भारत स्काउट एंड गाइड के डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि गिद्धों को प्रकृति का सफाई कर्मचारी कहा जाता है। जहां भी उन्हें मृत देह ऩजर आती है, वहां गिद्धों का झुंड पहुंच जाता है। यही आदत गिद्धों के पतन का कारण भी बन गई है। दरअसल, पिछले सालों में गाय, भैंसों को ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन दिया जाता था, जिसका दुष्प्रभाव पशुओं की मृत देह पर भी पड़ता था और इन पशुओं को खाकर गिद्ध अकाल मौत का शिकार हो जाते थे। इस दौरान अंकित जैन बंटी, विकास सैनी, स्वतंत्र व्यास, शेर सिंह यादव, रविंद्र घोष, आशीष साहू भारत स्काउट एंड गाइड से भरत रजक, रोहित बरार, उमेश कुशवहा, दीपचंद कुशवहा वन रक्षक सुदेश कुमार, शेर सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाती हैं गिद्धों की सात प्रजातियां
संयोजक पर्यावरणविद पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पूरे विश्व में गिद्ध की 22 प्रजातियां हैं, जिसमें से 9 प्रजातियां भारत में और इनमें से सात प्रजातियां बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाती हैं। यहां प्रमुखता से लांग बिल्ड गिद्ध, व्हाइट बैक्ड गिद्ध, रेड हेडिड गिद्ध और इज्पशिन गिद्ध पाई जाती हैं। हिमालयन रेफोर गिद्ध , युरेसियन गिद्ध और सिनेरियस गिद्ध यहां सर्दी के मौसम में आते हैं।