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आधी सजा काटने पर व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा हो सकता है बंदी

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jail 2.jpg - फोटो : jail 2.jpg
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ललितपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत मंगलवार को जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जेल में निरुद्ध चल रहे बंदियों के लिए उनके कानूनी अधिकार बताए। इस मौके पर कुछ बंदियों ने न्यायालय में लंबित अपने मामलों में पैरवी के लिए अधिवक्ता की मांग की।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष/ जिला जज चंद्रोदय कुमार के निर्देशन में आयोजित शिविर में बंदियों को दी जाने वाली सुविधा, अधिकार एवं अन्य विषयक जानकारी दी गई। प्राधिकरण के सचिव हरीश कुमार ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39क में आर्थिक तंगी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रह जाए, जिसके लिए निशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था की गई है। जेल में निरुद्ध कोई भी बंदी अपने प्रकरण में प्रदत्त सजा की आधी सजा जेल में व्यतीत कर ले, तो वह (बंदी विशेष परिस्थिति में) धारा 436ए सीआरपीसी के अंतर्गत लाभ पाने का अधिकारी है और वह व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा हो सकता है।
चिकित्साधिकारी डॉ. विजय द्विवेदी ने बताया कि जेल में रहते हुए बंदियों को अपने मानसिक स्तर को संतुलित रखना चाहिए। हमें अपने शरीर व मन को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से योग व ध्यान करना चाहिए। शिविर के दौरान बंदियों से उनकी समस्याओं के संबंध में पूछताछ की एवं उनकी समस्या के निवारण के लिए उपाय बतलाए गए। कुछ बंदियों द्वारा न्यायालय में लंबित अपने मामलों में पैरवी के लिए अधिवक्ता की मांग की गई, जिस पर प्राधिकरण के सचिव द्वारा कारागार अधिकारियों के माध्यम से प्रार्थना पत्र न्यायालय भिजवाने के लिए कहा गया। बंदियों को अवगत कराया गया कि उनके लिए नियुक्त अधिवक्ता द्वारा प्रकरण की उचित पैरवी न की जा रही हो तो वह इस संबंध में कारागार प्रशासन के माध्यम से अवगत कराएं। इस मौके पर जेलर वीरेंद्र कुमार वर्मा, समाज कल्याण अधिकारी अभिषेक अवस्थी, जिला प्राबेशन कार्यालय से जिला समन्वयक रागिनी प्रजापति, क्षेत्राधिकारी सदर फूलचंद्र, उपकारापाल जीवन सिंह, उपकारापाल भोलानाथ आंबेडकर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से रोहित राठौर, महेश प्रसाद गंगेले उपस्थित रहे।
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11 को होगा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
ललितपुर। शिविर में जेल में निरुद्घ बंदियों को अवगत कराया कि 11 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें वह अपने प्रकरणों को सुलह-समझौता के आधार पर निस्तारण करा सकते हैं। आम नागरिकों से भी अपील की कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौता के आधार पर लंबित प्रकरणों को निस्तारित करा सकते हैं।
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