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पैदल चलकर आए मजदूर यूपी -एमपी सीमा पर फंसे

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अमझरा घाटी पर सो रहे मजदूर - फोटो : LALITPUR
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डोंगरा खुर्द। वैश्विक महामारी कोराना से गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। आम जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। अधिकांश लोग घरों में ही कैद हो गए हैं, जो मजदूर अन्य शहरों में काम करते थे, उनका काम बंद हो गया है और अब वह अपने गांव पहुंचने के लिए पैदल ही चल रहे हैं। जिले से सटी मध्यप्रदेश की सीमा अमझरा घाटी पर करीब सौ की संख्या में मजदूर फंसे हुए हैं।
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लॉकडाउन में सबसे ज्यादा उन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो दो जून की रोटी की खातिर अपने घर से दूर जाकर अन्य प्रदेशों के महानगरों में मजदूरी कर रहे थे। हालांकि, यूपी सरकार ने दूसरे प्रांतों में फंसे हजारों मजदूरों को वहां से निकालने का कार्य किया है, फिर भी बड़ी संख्या में मजदूर अन्य राज्यों की सीमा पर फंसे हैं, जो अपने घर जाने के लिए परेशान हैं। ललितपुर जिले की अमझरा घाटी सीमा पर कड़ी नाकाबंदी की गई है। पुलिस तैनात है, जो पैदल या किसी वाहन से आने वालों को वापस लौटा दिया जा रहा है। यह मजदूर मध्यप्रदेश के मालथौन टोल प्लाजा के पास और घाटी गोशाला में फंसे हैं, जो उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। यहां भोजन की कोई व्यवस्था नहीं है। पुरुष, महिलाएं और छोटे बच्चे हैं, जो घर जाने के लिए रो रहे हैं। यह लोग जिला जालौन के निवासी हैं और अपने घर जाना चाहते हैं। इसके अलावा हैदराबाद से दस मजदूर हैं, जिन्हें संत कबीरनगर जाना है।
तेलंगाना व आंध्रप्रदेश से लौटै
देश के अन्य राज्यों से पैदल चलकर मजदूर वापस उत्तर प्रदेश के जालौन, झांसी, संतकबीर नगर, मप्र के मुरैना जाना चाहते हैं, लेकिन इन्हें यूपी सीमा में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। ये मजदूर तेलंगाना, आंध्रप्रदेश राज्यों से वापस लौटे हैं।
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पहली बार गए थे काम पर
संत कबीरनगर से दस लोग हैदराबाद में पेंटर का काम करने गए थे। वहां पर पहुंचे और लॉकङाउन हो गया। पीड़ित सत्यानंद चौरसिया ने बताया कि ख़ाने पीने के लिए पैसा नहीं है। दो दिन से खाना नहीं खाया और छह दिनों से नहाया- धोया नहीं है।
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छोटे बच्चे हो रहे परेशान
तेलंगाना से पांच परिवार आएं हैं। इन्हें जालौन जाना है। इनके साथ छोटे- छोटे बच्चे हैं, जो भूख प्यास से व्याकुल हैं। भीषण गर्मी में बार्डर पर आकर फंस गए हैं, जहां पर भोजन की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे बच्चे अधिक परेशान हैं।
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ट्रक वाले दे रहे सहारा
ट्रकों के ड्राइवर केबिन में मजदूरों को लिटाकर ले जा रहे हैं। ऊपर से रस्सी से तिरपाल कस देते हैं, जो जोखिम भरा सफर रहता है। स्थानीय लोग जंगल का रास्ता बताकर मजदूरों को निकाल रहे हैं।

बाहर से पैदल चलकर आए मजदूर- फोटो : LALITPUR

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