मड़ावरा। खेतों में खड़ी किसान की फसल को दैवी आपदा एवं अन्य दुर्घटना में नुकसान होने पर उन्हें मुआवजे के रूप में सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इससे किसान परेशान बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
बैंकों में किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से खेती के लिए ऋण लेने वाले किसानों का संबंधित बैंक शाखा द्वारा बीमा धन की प्रीमियम काट लेने के बावजूद भी क्षेत्र के तमाम प्रभावित किसानों को वर्ष 2019 का कोई भी मुआवजा नहीं मिल सका। कई किसानों के खाते बीमा की प्रीमियम काटते समय उसके खाते की केवाईसी समेत अन्य दस्तावेज सभी ठीक रहे लेकिन किसानों को मुआवजा लौटाते समय दस्तावेजों में कमी बताकर उन्हें अब टरकाया जा रहा है। क्षेत्र के सैकड़ों किसान मुआवजे के लिए संबंधित बैंक शाखाओं समेत बीमा कंपनी के अधिकारियों के चक्कर काटकर परेशान हो चुका है। वर्ष 2020 में भी जिले में किसान बीमा के एचडीएफसी एग्रो को प्रीमियम दी गई लेकिन खरीफ के सीजन में सोयाबीन और उड़द की फसल अतिवृष्टि के चलते बर्बाद हो गई। किसानों को कोई मुआवजा बीमा कंपनी द्वारा नहीं दिया गया। किसान उत्पादन में साल दर साल हो रहे नुकसान से टूट चुका है वहीं बीते दो वर्ष के कोरोना काल ने भी उन्हें कर्ज में डुबा दिया।
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केस-1
अपूर्ण केवाईसी का किया जा रहा बहाना
क्षेत्र के मौजा भरतिया मौजे में लगभग 15 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले भैयालाल त्रिपाठी बताते हैं कि प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक मड़ावरा से केसीसी पर पांच लाख का लोन लिया। वर्ष 2019 में किसान बीमा के लिए उनसे 5535 रुपये प्रीमियम लिया गया लेकिन उन्हें नुकसान होने के बावजूद बीमा राहत का भुगतान नहीं किया गया। बीमा कंपनी के अधिकारियों द्वारा उनके बैंक खाते में आधार कार्ड लिंक नहीं होने का बहाना कर टरकाया जा रहा है।
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केस-2
बीमा कंपनियों का हो रहा भला
ग्राम साढूमल निवासी मकबूल ख़ां बताते हैं प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना के माध्यम से किसानों का कम बल्कि बीमा कंपनियों का ज्यादा फायदा हो रहा है। प्रीमियम काटने के बाद भी नुकसान होने पर मुआवजा नहीं मिलने से किसान भुखमरी की ओर हैं। मुआवजा न मिलने से किसान चक्कर लगाने को मजबूर हैं जबिक बीमा कंपनियों का भला हो रहा।
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केस-3
जिम्मेदार अधिकारी नहीं करते सहयोग
क्षेत्र के ग्राम साढूमल निवासी प्रगतिशील किसान कन्हैयालाल उर्फ राजू गोस्वामी कहते हैं कि किसानों की सहयोग के लिए शासन द्वारा भले ही तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हो लेकिन किसान को कोई दिक्कत होने पर संबंधित बैंक, जिम्मेदार अधिकारी द्वारा कोई भी सहायता नहीं की जाती। सहयोग एवं जानकारी के अभाव में क्षेत्र के किसान कर्ज में डूबकर और भी परेशान होता जा रहा है।