ललितपुर। हिंदी में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। आज के इस भूमंडलीकरण के दौर में हिंदी ने अपनी दस्तक विश्व के लगभग सभी देशों में दी है। लगभग 70 करोड़ लोग अपने दैनिक जीवन में हिंदी का प्रयोग करते हैं। हिंदी हमारी राजभाषा है। हिंदी के द्वारा हम शिक्षा, राजनीति, इतिहास, विज्ञान ,वाणिज्य आदि सभी क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।
हिंदी भाषा को देश में बेहतर स्थान नहीं मिल पाया है। आज भी अंग्रेजों को ज्यादा अहमियत मिलती है। यदि विद्यार्थी नवीन साहित्य का सृजन करेंगे तो हिंदी भाषा न केवल सुदृढ़ होगी अपितु उसका साहित्य भी समृद्ध और प्रभावशाली होगा, साथ ही यदि युवाओं में साहित्य सृजन की भावना विकसित होगी।
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साहित्य सृजन की क्षमता विकसित होने से हिंदी भाषा होगी सुदृढ़
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉक्टर ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि वर्तमान में नई पीढ़ी में विद्यार्थियों में साहित्य के पठन-पाठन के साथ सृजन में रुचि घटती जा रही है। इसके फलस्वरूप समाज में हिंदी भाषा कमजोर पड़ रही है। हमें स्नातक एवं स्नातकोत्तर के छात्रों में साहित्य सृजन की भावना को प्रबल करना होगा। विश्वविद्यालयों एवं शासन को चाहिए कि साहित्य सृजन को पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर हिंदी के विद्यार्थियों को साहित्य सृजन की शिक्षा प्रदान करें।
हिंद का स्वाभिमान है हिंदी
नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सुधाकर उपाध्याय ने बताया कि हिंदी भाषा में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। हिंदी हमारी राजभाषा भी है। हिंदी सिनेमा में अच्छी हिंदी को जानने वालों की कमी है। हिंदी सिनेमा, साहित्य लेखन, प्रयोजनमूलक हिंदी, अनुवाद हिंदी, व्यवसायिक हिंदी, संगणक हिंदी में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। हिंदी को यदि हम अच्छी तरह से आत्मसात करेंगे तो निश्चित रूप से हमें अच्छा रोजगार प्राप्त होगा।