मड़ावरा। जिले में झमाझम बारिश होने से किसानों के खिले हुए चेहरे मंगलवार को बोहनी के लिए खाद नहीं मिलने से मुरझा गए। किसानों का आरोप है कि खाद व्यापारियों द्वारा डीएपी व यूरिया की जमाखोरी कर ओवररेटिंग की जा रही है। उधर, किसानों का आरोप है कि व्यापारियों ने दुकानों में ताले डाल दिए।
किसानों का कहना है कि जरूरतमंद किसान 50 किग्रा वजन डीएपी की एक बोरी 1400 रुपये तक में लेने को तैयार हैं बावजूद इसके उन्हें खाद नहीं मिल रही।
सोमवार को जनपद के अधिकतर हिस्सों में अच्छी बारिश हो जाने से मटर, मसूर और चने की बोहनी के लिए पलेवा करने की जरूरत नहीं है अब एक साथ बोहनी का मौका मिलने से किसान खाद की व्यवस्था के लिये भी एक साथ उमड़ पड़ा है जिसका फायदा जमाखोरी करके उठाया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि दुकानदार चेकिंग और खाद की कमी का बहाना बनाकर शटर बंद कर गायब हैं वहीं कुछ किसानों का आरोप है कि उनसे 1400 प्रति बोरी के हिसाब से पैसा जमा कराया गया है जिसके एवज में मौका देखकर उन्हें खाद मिल जाएगा।
ग्राम नडारी निवासी किसान पप्पूराजा कहते हैं कि भाड़ा और पल्लेदारी में 50 रुपये प्रति बोरी का खर्च है, लेकिन एक बोरी के 1400 रुपये वसूले जाना किसी भी दशा में वाजिब नहीं हैं।
ग्राम तिसगना निवासी राजाराम पाल आरोप लगाते हुए कहा कि खाद की कोई कमी नहीं है व्यापारियों द्वारा मुनाफाखोरी के लिए मड़ावरा समेत जनपद के अन्य सीमांत इलाकों से डीएपी एवं यूरिया मध्यप्रदेश के शहरों-कस्बों में भेजा जा रहा है।
किसानों को चिंता करने की बात नहीं है बुधवार को खाद की सभी दुकान खुलवाकर किसानों को निर्धारित दामों पर खाद मुहैया कराई जाएगी। खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कराई जाएगी।
मनोहरलाल पंथ, राज्यमंत्री
किसान से जानकारी लेते तहसीलदार- फोटो : LALITPUR
बंद पड़ी खाद की दुकान- फोटो : LALITPUR