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यूपी की खाद से एमपी के किसान चला रहे काम

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पुलवारा में खाद के लिए लगी महिलाओं की कतार - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर/ तालबेहट। अफसरों के तमाम दावों के बीच करीब 43 हजार मीट्रिक टन डीएपी आने के बाद भी किसान परेशान हैं। जनपद की सीमा से लगे मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के करीब दो दर्जन गांवों के किसान 1500 से 1600 रुपये प्रति बोरी दलालों के माध्यम से ले जा रहे हैं। खास बात तो यह है कि कालाबाजारी रात के अंधेरे में हो रही है जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यही वजह है कि लगातार डीएपी की रैक आने के बाद भी जनपद के किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है।
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तालबेहट तहसील क्षेत्र तीन ओर से मध्य प्रदेश से सटा है। एक ओर मध्य प्रदेश के दतिया जिले के बसई, टीकमगढ़ में गुमटाघाट और एक सीमा अशोक नगर को जोड़ती है। जब भी खाद्यान्न वस्तुओं की कीमतों में भारी अंतर आता है। दोनों प्रदेशों के व्यापारी अधिक लाभ कमाने के लिए कालाबाजारी शुरू कर देते हैं। क्षेत्र में डीएपी की किल्लत से उसकी कालाबाजारी शुरू हो गई है। किसान नेताओं ने बताया कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में खाद के दामों में भारी अंतर होने के चलते कुछ युवक किसान बन कर उत्तर प्रदेश से डीएपी खाद खरीद कर मप्र जाकर बेंच रहे हैं जिसमें दुकानदार और पुलिस की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए दोनों जनपदों की सीमा पर सघन तलाशी की मांग की है।
अन्य समितियों पर क्यों पड़ रही है कमी
जब प्रशासन तहसील क्षेत्र की समस्त 15 साधन सहकारी समितियों पर डीएपी भेज रहा है तो अन्य क्षेत्र के किसान तालबेहट समिति पर खाद लेने क्यों आ रहे है। इस समिति पर प्रति दिन पूराकलां, पूराविरधा, चौबारा, पारौन आदि गांवों के किसान आ रहे है।
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दलालों की वजह से कम नहीं हो रही किल्लत
पुलवारा। कस्बा बार में खाद की आपूर्ति सामान्य नहीं हो पा रही है। डीएपी पाने के लिए समितियों के साथ ही दुकानों पर किसानों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। आधार कार्ड देखकर किसानों पर खाद का वितरण किया जा रहा है। एक से दो बोरी खाद कुछ किसानों को मिल रही है तो बड़ी संख्या में किसान बिना खाद के वापस जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक खाद की किल्लत की एक बड़ी वजह क्षेत्र में सक्रिय दलाल भी हैं, जो सहकारी समितियों एवं निजी दुकानों से खाद की बोरियां लेकर मध्य प्रदेश से आ रहे लोगों को तीन से चार सौ रुपये प्रति बोरी मुनाफा लेकर 1500 से 1600 रुपये तक में बेच दे रहे हैं। बताते चलें कि कस्बा बार के ग्रामीण क्षेत्र से मध्य प्रदेश की सीमा लगी हुई है। मध्य प्रदेश में भी खाद की कमी होने के कारण वहां से किसान बार क्षेत्र में दलालों से खाद मध्यप्रदेश ले जा रहे हैं।
रिश्तेदारों को भी मुहैया करा रहे डीएपी
बानपुर। मध्यप्रदेश में रहने वाले लोगों की कुछ रिश्तेदारी जनपद के सीमावर्ती जिलों में हैं। बताते हैं कि जब अपने क्षेत्र में खाद मुहैया नहीं हो पा रही है तो वह अपने रिश्तेदारों से संपर्क कर उनको मिलने वाली बोरियों से कुछ बोरी ले जाकर काम चला रहे है। यही वजह है कि क्षेत्र के किसानों को पर्याप्त खाद मुहैया नहीं हो पा रही है।
साधन सहकारी समिति से हो रही कालाबाजारी
ललितपुर। ग्राम असऊपुरा निवासी किसानों ने डीएम को दिए ज्ञापन में बताया कि नहर से पलेवा करने के बाद अब बुवाई को खाद की आवश्यकता है, लेकिन कालाबाजारी की जा रही है। आरोप है कि सचिव अन्य गांव में पहुंच कर अंगूठा लगवा कर किसान को एक बोरी देकर उसके नाम पांच बोरी दर्ज कर रहे हैं। शिकायत करने पर अभद्रता की जाती है। शेष बोरियों को 14 सौ से 15 सौ रुपये में बेच रहे हैं। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन पर रोहित, इंद्रपाल, राजाराम, आशाराम, संतोष, राकेेश कुमार, रवींद्र कुमार, देशराज, लल्लूराजा, घनश्याम, खेमचंद्र, आदि के हस्ताक्षर बने हैं। एआर कोआपरेटिव ने बताया कि खाद की कालाबाजारी की सूचना मिली है। जांच कराने के बाद दो षियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिले में यहां से खाद नहीं जा रही है। इस संबंध में शिकायतें मिलने पर खुद भी रात में चेकिंग की और अब होमगार्डों की ड्यूटी भी लगा दी है। ये अलग बात हो कि किसी का किसी ने अपने रिश्तेदार एक या दो बोरी खाद दी हो और वह ले गया हो। फिलहाल तहसील क्षेत्र में खाद की कमी नहीं है। एसपी सिंह, एसडीएम

पुलवारा में खाद के लिए लगी भीड़- फोटो : LALITPUR

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