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उपवास आत्मा की शक्ति का प्रमुख साधन- अंतरमति

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चंद्रप्रभु जिनालय में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते श्रद्धालु - फोटो : LALITPUR
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मड़ावरा। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या प्रेरणास्थली प्रणेता आर्यिका मां आदर्शमति माता की संघस्थ आर्यिका रत्न अंतरमति माता के सानिध्य में श्री महावीर विद्या विहार में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम में पर्यूषण पर्व के दौरान आर्यिका श्रीअक्षयमति माता जी ने सात उपवास किए। उपवास उपरांत आर्यिका श्री अंतरमति माता द्वारा पारणा कराया गया।
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आर्यिकाश्री का पारणा पदमचंद्र, सुमत कुमार, सुभाष मोदी परिवार ने कराया। आर्यिका अंतरमति माताजी ने कहा उपवास कर्म निर्जरा का प्रमुख है, उपवास आत्मा को शक्ति प्रदान करता है, अगर आत्मा को सुख हो तभी धर्म हो सकता है। चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि पर्यूषण पर्व के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विशेष सहयोग प्रदान करने पर जैन युवा जागृति सेवा संघ के म्यूजिक डायरेक्टर धर्मेंद्र सराफ, अध्यक्ष प्रदीप सिंघई, प्रदीप घिया एवं वर्णी व्यायामशाला के सदस्य प्रदीप जैन खुटगुंवा, अनिल जैन, साहिल बजाज, नेहा बजाज का सम्मान किया गया।
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चंद्रप्रभु जिनालय में हुआ पूजन अर्चन
जाखलौन। नवयुवक मंडल ने चंद्रप्रभु जिनालय में सुबह मंगलाष्टक, ध्वजारोहण,अभिषेक, शांतिधारा, संगीतमय देव शास्त्र गुरु पूजन किया। इस अवसर पर भक्तांबर अखंड पाठ प्रारंभ हुआ। शाम को भक्तामर स्तोत्र के 48 कव्यो के मंत्रों द्वारा दीप प्रज्वलन और संगीतमय आरती हुई। दिगंबर जैन समाज के नवयुवक मंडल की कमेटी ने भक्ति की। इस मौके पर नितिन कुमार जैन, डोलू जैन, विवेक जैन, विक्की जैन, निखिल जैन, सलिल जैन, सौरभ जैन, अमित जैन, पंकज जैन, शशांक जैन, दर्शन जैन, संजय जैन, मोदी प्रदीप कुमार जैन , श्रेयांश जैन, आदि मंदिर में उपस्थित रहे।
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परमात्मा ही पूज्य है
महरौनी। महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वाधान में सत्य सनातन वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार हेतु पूजा का वैदिक स्वरूप विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन संयोजक शिक्षक लखन लाल आर्य ने किया।
वैदिक विद्वान आचार्य पंडित विष्णुमित्र वेदार्थी ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना करके स्तुति-प्रार्थना-उपासना के माध्यम से पूजा के तीन साधन बताए। पूजा के वैदिक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूजा दो प्रकार की है जिसमें एक लौकिक पूजा जिससे हमारे माता-पिता आचार्य आदि उनकी आवश्यकतानुसार वस्तु प्रदान कर की जाती है वहीं दूसरी पूजा आध्यात्मिक आंगन में परमात्मा की होती है। क्योंकि परमात्मा पूज्य है और हम सभी उसके पूजक हैं। इस दौरान आर्य समाज के प्रधान रामसेवक निरंजन शिक्षक, प्रेम शंकर तिवारी, संदीप सोनी, नारायण दास बंजारा, पारसमणि पुरोहित, महिपत सिंह निरंजन, शिक्षक भावनी शंकर लोधी, राम उजागर लोधी,अवधेश प्रताप सिंह, देवेंद्र सेन मौजूद रहे।
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