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किसान की पीड़ा: लागत हम लगाते और दाम व्यापारी तय करते

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महरौनी। फसल की बुवाई से लेकर कटान तक किसान मशक्कत करते हैं। बेमौसम बारिश से फसल खराब भी हो जाती है। इसके बाद भी मंडी में उपज के दाम व्यापारी अथवा आढ़ती तय करते हैं। इससे किसानों को लागत तक नहीं मिल पाती है।
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किसानों का कहना है कि खरीफ की फसल में भारी नुकसान हो गया है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
मेहनत कर खेत में फसल तैयार करने वाले किसानों की पीड़ा कोई सुनने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि फसल कभी अतिवृष्टि से तो कभी सूखा पड़ने से बर्बाद हो जाती है। अन्ना जानवर और बंदरों से भी फसल को नुकसान हो रहा है। इस सब से जब कुछ फसल बच जाती है तो वह अपनी उपज को बेचने के लिए बाजार जाता है। जब बाजार में किसान अपनी फसल की उपज लेकर व्यापारी के पास ले जाता है तो वहां भी व्यापारी का भाव चलता है और तौल से आधा किलो अधिक तौला जाता है। इतना सब कुछ सहने के बाद भी किसान किसी से उफ तक नहीं करता है। दरबदर की ठोकरें खाता फिरता है। किसानों का कहना है कि इस साल बारिश व बीमारी से खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है। अब सरकार इस ओर ध्यान देकर किसानों को फसल बीमा और मुआवजा देना चाहिए।
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कुदरत का कहर और जानवरों से बचने के बाद जो फसल बचती है उसकी लागत की परवाह न करते हुए व्यापारी दाम तय करता है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।- नरेंद्र सिंह, किसान जखौरा
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सोयाबीन, उड़द, मूंग के साथ तिली की फसल बोई थी। अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में हुई बारिश से तिली की फसल नष्ट हो गई थी और अभी की बारिश से उड़द, मूंग की फसल खराब हो गई। विक्रांत सिंह, किसान, जखौरा।
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खेती करना अब घाटे का काम हो गया है। हर तरफ से जोखिम उठाना पड़ता है। क्या करें मजबूरी है। फसल बोने से लेकर जब तक मिल में अनाज नहीं पहुंचता तब तक किसान का अनाज ही गिरता है। राजेंद्र सिंह, किसान जखौरा।
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