ललितपुर। केंद्र सरकार द्वारा तमाम योजनाओं संचालित होने के बाद भी किसानों की माली हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। क्योंकि जिम्मेदार ही योजनाओं के प्रति उदासीन हैं। ऐसी ही स्थिति वर्ष 2019 में खरीफ की फसल के बीमा क्लेम की बनी हुई है। 13 बैंकों ने 7551 किसानों के खाते से प्रीमियम राशि काट ली, लेकिन डाटा पोर्टल पर अपलोड न होने से किसान क्लेम से वंचित हो गए है। अब विभागीय अधिकारी बैंकों से रिकवरी के लिए पत्राचार का हवाला देकर मामला ठंडे बस्ते में किए हुए हैं। दो वर्ष बीतने के बाद भी किसान कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
केंद्र सरकार द्वारा किसानों को आपदाओं से नष्ट हुई फसलों में राहत देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई जा रही है, इसमें आपदाओं से नष्ट फसल के नुकसान की भरपाई के लिए बीमा होने पर क्लेम दिया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी फसल का बीमा कराना होता है। इसमें ऋणी किसानों का बैंकों द्वारा स्वयं ही प्रीमियम राशि काटकर बीमा किया जाता है। बैंक प्रीमियम राशि काटकर किसान का डाटा बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड कर देते हैं और किसान की फसल का बीमा हो जाता हे। वहीं, दूसरी तरह से किसान स्वयं ही सीएससी व बीमा कंपनी के पास संपर्क कर प्रीमियम राशि जमा कर बीमा करा लेता है।
वर्ष 2019 में दस दिन तक हुई बारिश से खरीफ की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। केंद्र और राज्य सरकार की टीमों द्वारा सर्वे में 70 प्रतिशत से अधिक नुकसान माना था। इस दौरान डेढ़ लाख से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया था। जिसमें 13 बैंकों ने ऋणी किसानों के खाते से प्रीमियम राशि तो काटी ली, लेकिन किसानों को डाटा बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। तय अवधि निकलने के बाद पोर्टल नहीं खुला और 7551 किसान बीमा क्लेम से वंचित हो गए। दो वर्ष से किसान लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, जिस पर कुछ अधिकारी आश्वासन देते हैं।
बैंक से रिकवरी पत्र को हुए छह माह
बैंकों की लापरवाही मानते हुए कृषि विभाग ने बैंकों के उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया था, जिस पर बैंकों से रिकवरी कर किसानों को बीमा क्लेम दिलाए जाने के निर्देश दिए गए थे। छह माह का समय बीत गया है, लेकिन अब मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। किसान लगातार चक्कर काट रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार मामले में उदासीन बने हुए हैं।
बैंकों के उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। बैंकों द्वारा रिकवरी कर वंचित किसानों को बीमा क्लेम दिया जाएगा।
- संतोष कुमार सविता, उप कृषि निर्देश