ङोगरा खुर्द/ललितपुर। डोंगरा खुर्द में पहाड़ी पर विराजमान विंध्यवासिनी मैया ङुंगरासन माता की महिमा निराली है। माता रानी भक्तों के कष्टों को हरने वाली है और उनकी कृपा से बिगड़े काम बनते हैं। चैत्र नवरात्र पर्व पर देवी माता के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और मनौतियां पूर्ण होने पर भक्त यहां धार्मिक अनुष्ठान करवाकर धर्म लाभ लेते हैं।
मान्यता है की नवरात्र के पर्व पर माता रानी की भक्तों पर विशेष कृपा बरसती है इसलिए बड़ी संख्या में माता रानी का आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालु दूर दूर से यहां आते हैं। पर्व के प्रथम दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं ने माता रानी के दरबार में जल एवं पुष्प अर्पित किए। आचार्यों ने मंत्र उच्चारण के बीच विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ माता रानी को चुनरी चढ़ाकर धर्म लाभ लिया। मंदिर पर धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला नौ दिनों तक चलता है। पंचमी, अष्टमी और नवमी पर मंदिर पर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ उमड़ती है। नवमी पर भक्त गाजे बाजे के साथ मंदिर पर ज्वारे चढ़ाने आते हैं। भक्ति से प्रसन्न होकर सिद्धियों से परिपूर्ण माता भक्तों का कल्याण करती हैं। पंचमी को ङुंगरासन मैया का विशेष पूजन अर्चन अभिषेक एवं सहस्त्रार्चन किया जाता है जिसमें क्षेत्र एवं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से श्रद्धालु आकर भाग लेते हैं।
विंध्यवासिनी मैया को ङुंगरासन माता के नाम से जानते हैं श्रद्धालु
डोंगरा खुर्द में विराजमान वही महामाया विंध्यवासिनी है जो विंध्याचल में स्थित हैं। यह वही कन्या है जिन्होंने देवकी के गर्भ से जन्म लिया था और जब मथुरा के राजा कंस के उन्हें पकड़ कर उनकी हत्या करनी चाही थी तो वही कन्या कंस के हाथों से छूटकर आकाश में चली गई थी, जो विंध्याचल में विंध्यवासिनी के नाम से विख्यात हैं। जो प्राचीन यंत्र विंध्यवासिनी में स्थापित है और वही यंत्र ङुंगरासन माता मंदिर पर स्थापित पत्थर अंकित है यही यंत्र नौ दिवसीय के रूप में पूजते हैं। विद्वानों ने बताया गया है कि पूर्व में ऋषि मुनियों ने यहां आकर तपस्या की जिससे आज लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।