ललितपुर/डोंगरा खुर्द। प्राचीन धरोहरों को समेटे ललितपुर का पर्यटन लोगों को तो खूब लुभाता है, लेकिन राजनीतिक दल इस पर मौन हैं। पर्यटन स्थल दुर्दशा के शिकार हो चुके हैं। कहने को यह धरोहरें पुरातत्व विभाग के अधीन हैं, लेकिन यहां विकास शून्य है। चुनाव में राजनीतिक दल बेरोजगारी, सड़क, सिंचाई समेत तमाम मुद्दों पर मुखर हैं और वादे कर रहे हैं, लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने का मुद्दा दलों के एजेंडे से दूर है।
जिले के पाली तहसील क्षेत्र में भगवान नील कंठेश्वर, दुधई में चंदेलकालीन मंदिर अद्भुत कारीगरी देखते ही बनती है। इनमें सूर्य, शिव और जैन मंदिर भी बने हुए हैं। यहां के मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। वहीं जंगल में स्थित नरसिंह भगवान की दिव्य प्रतिमा देखने दूर दूर से लोग आते हैं। देवगढ़ को विश्व के मानचित्र में पर्यटन स्थल के रुप में मान्यता मिली हुई है। लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्या योजना है उसका कोई राजनीतिक दल जिक्र नहीं कर रहा है।
कई बार मांग की, लेकिन मिला केवल आश्वासन
पर्यटन क्षेत्र के विकास का मुद्दा भी प्रमुख रहा है। कई बार स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से पर्यटन स्थलों के विकास कराने की मांग की लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला। कई स्थलों पर पुरातत्व विभाग ने विकास के लिए एक साइन बोर्ड लगा दिए लेकिन कुछ नहीं किया। इन पर्यटन स्थलों पर दूर दराज के क्षेत्रों से लोग घूमने एवं दर्शन करने आते हैं लेकिन कई अधिकांश जगहों पर सड़क और बिजली की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
बारिश के दिनों में रास्ता भी हो जाता बंद
पांडव वन धाम नाराहट क्षेत्र स्थित चंडी मंदिर, दुधई के सूर्य एवं शिव मंदिर, नरसिंह मंदिर, चांदपुर, जहाजपुर, रणछोर धाम मुचकंद गुफा आदि ऐसे स्थान हैं जहां न तो सड़क है और न ही बिजली और ठहरने की व्यवस्था है। बरसात के दिनों में रास्ता नहीं होने के कारण आवागमन बंद हो जाता है, जिससे वर्ष भर इन स्थानों का सैलानी आनंद नहीं ले पाते हैं। इन स्थानों की खूबसूरती बारिश के समय सबसे ज्यादा देखने लायक होती है, अगर इन स्थानों का विकास किया जाए तो यहां पर देश के अलावा विदेशों से भी सैलानी यहां आ सकते हैं।
दो स्थान ही हो सके विकसित
जिले के अधिकांश पर्यटन स्थल विकास की बाट जोह रहे हैं, लेकिन अभी सिर्फ दो धार्मिक स्थलों एवं पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रयास किए गए हैं। जिनमें 50 लाख रुपये पांडव वन धाम और 50 लाख अमझरा घाटी मंदिर के विकास के लिए स्वीकृत हुए हैं। इसके अलावा दोनों जगह रोशनी के लिए पांच-पांच लाख रुपये से सौर ऊर्जा प्लांट भी लगवाए गए हैं।
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प्रमुख पर्यटन स्थल
- देवगढ़ को विश्व के मानचित्र में पर्यटन स्थल की मिली मान्यता
-जैन क्षेत्र मदनपुर सीरौन जी, गिरारगिरीजी आदि जैन तीर्थ क्षेत्र
-जैन धर्म से संबंधित स्थानों में चांदपुर और जहाजपुर
-दुधई स्थित चंदेल कालीन मंदिर सूर्य,शिव और जैन मंदिर
-पाली स्थित नील कंठेश्वर भगवान
-दुधई क्षेत्र के जंगल में नरसिंह भगवान की दिव्य प्रतिमा
-बंट गांव के पास में देखने लायक झरना एवं च्यवन आश्रम
-अमझरा घाटी हनुमान मंदिर
-नाराहट क्षेत्र में चंडी मंदिर,डुंगरासन माता डोंगरा खुर्द,पांडव वन धाम
-धौर्रा के जंगलों में बेतवा नदी के किनारे रणछोड धाम, मुचकंद गुफा
-गिरार में धसान नदी के किनारे पहाड़ी पर प्राचीन राम जानकी मंदिर
- तालबेहट में हजारिया महादेव झूमर नाथ और देवा माता मंदिर आदि प्रमुख धार्मिक स्थल
- कुम्हैड़ी स्थित अंजनी माता मंदिर, बुदनी में सूर्य मंदिर, पठा देवी मंदिर।
इनका क्या कहना
पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाए तो रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे। पर्यटन स्थल के आसपास दुकाने, रेस्टोरेंट और होटल व्यवसाय भी बढ़ जाएगा। अफसरों और जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। पर्यटन के क्षेत्र में जनपद में अपार संपदा है।- डॉ. संजीव शर्मा, प्रोफेसर नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर
जिले में हवाई पट्टी बनने से यहां पर दूर दूर से पर्यटक आएंगे, लेकिन पर्यटन स्थलों तक जाने के संसाधन और वहां सड़क,बिजली व ठहरने की सुविधाएं न होने से उन्हें निराश होकर लौटना होगा। दलों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।-डॉ. प्रकाश श्रीवास्तव, प्राचार्य केपीएस डिग्री कॉलेज ककरुआ ।