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जोत बही की अनिवार्यता के विरोध में किसानों का तहसील में प्रदर्शन

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तालबेहट। खाद की कालाबाजारी करने वालों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सोमवार को किसानों को निजी दुकानों से खाद आसानी से मिल गई। हालांकि खाद के लिए जोत बही की अनिवार्यता से नाराज कुछ किसान तहसील पहुंचे और नारेबाजी करने लगे, लेकिन तहसीलदार ने उनकी समस्या सुनी और जोत बही की जगह खाद के लिए नकल खतौनी की अनिवार्य कर दिया। जिससे किसानों का गुस्सा शांत हो गया।
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पर्याप्त मात्रा में खाद की आपूर्ति होने के बावजूद रबी फसल की बुआई के अंतिम चरण में डीएपी खाद के संकट से किसानों के साथ साथ प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारी परेशान हैं। वहीं किसान अब भी कई जगह खाद के लिए लाइन में लगे नजर आ रहे है। पिछले दिनों तालबेहट क्षेत्र में लगभग तीन सैकड़ा किसानों द्वारा आधार कार्ड पर कई बार खाद खरीदने का मामला सामने आने पर प्रशासन ने आधार कार्ड और जोतबही के दिखाने पर ही किसान को खाद देने के निर्देश जारी किए थे। प्रशासन की इस मुहिम का व्यापक असर दिखा। सोमवार को जब किसान समितियों एवं निजी दुकानों पर खाद लेने पहुंचे तो वहां मौजूद संचालकों ने आधार कार्ड के साथ जोत बही मांगी तो किसान सकते में आ गए। बाद में वे किसान नेताओं के कहने पर नारेबाजी करते हुए तहसील पहुंचे। जहां उन्होंने तहसीलदार राघवेंद्र शर्मा को अपनी समस्या बताई। जिस पर उन्होंने उच्च अधिकारियों से संपर्क कर आधार कार्ड एवं नकल खतौनी पर ही खाद देने केे निर्देश दिए। जिसके बाद किसानों को खाद मिल सकी।
प्रतिदिन लाइन में लगने वाले नहीं आए नजर
प्रशासन की किसानों को जोत बही या लेखपाल द्वारा प्रमाणित नकल खतौनी लाने की रणनीति काफी सफल नजर आई। जिसके चलते सोमवार को समिति या निजी दुकानों पर खाद वितरण के समय हमेशा लाइन में नजर आने वाले और खुद को किसान बताने वाले लोग दिखाई नहीं दिए।
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