तालबेहट/बिजरौठा। आजादी के 75 साल बाद भी बिजरौठा क्षेत्र में इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई के लिए कोई कॉलेज नहीं बन पाया है। इससे क्षेत्र के लोगों में काफी नाराजगी है। लोगों ने इंटरमीडिएट कॉलेज खुलवाने के लिए कई बार प्रयास किया लेकिन उन्हें हर बार आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल न हो सका।
तहसील तालबेहट मुख्यालय से मात्र सात किमी की दूरी स्थित ग्राम पंचायत बिजरौठा की गणना विकास खंड के बड़े गांवों में होती है। एक दर्जन से अधिक मजरों में बसे इस गांव की आबादी 15 हजार से ऊपर है। इसके आसपास पारा, रारा, वादीवर, गुलेंदा, भवरकली, कोटरा, राजपुर, लालौन, चक आदि गांव हैं। इन सभी गांवों के छात्र-छात्राओं को इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए कोई सुविधा नहीं है। मजबूरी में इन गांवों के छात्र-छात्राओं को तालबेहट, जखौरा या अन्य जिलों में प्रवेश लेना पड़ता है। जिसके चलते गरीब अभिभावक अपने बच्चों को आगे की पढ़ाई का भार न उठा पाने के कारण उनकी पढ़ाई बंद करवा देते है।
क्षेत्र के लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को बौलारी में एक इंटरमीडिएट कॉलेज खुलवाने की ओर अवगत कराया लेकिन हर बार ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया। लेकिन उस पर अमल आज तक न हो सका। इससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। इस संबंध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र देकर बौलारी में इंटरमीडिएट कॉलेज खुलवाने की मांग की है।
इस बार जिला पंचायत की बैठक में बौलारी में इंटरमीडिएट कॉलेज बनवाने का प्रस्ताव पास कराने का प्रयास करूंगा।
डॉ. सत्येंद्र सिंह बुंदेला, प्रतिनिधि जिला पंचायत सदस्य बिजरौठा क्षेत्र
एक दर्जन से अधिक गांवों के बच्चे इंटर कॉलेज न हो पाने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।
राकेश कुशवाहा, रारा
कॉलेज खुल जाने से क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाई की सुविधा हो जाएगी तथा अभिभावकों को आर्थिक रूप से काफी राहत मिल जाएगी।
छोटू साहू
चुनाव के समय हर बार प्रत्याशियों ने इंटरमीडिएट कॉलेज खुलवाने का आश्वासन दिया। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सब अपने वादे भूल गए।
सोनी कुशवाहा