ललितपुर। बारिश के बाद निकल रही धूप व नमी से खरीफ फसलों में रोग लगने भी संभावना रहती है। ऐसे में मौसम में फसलों में इल्ली, तुड़का व खरपतवार में चौड़ी पत्ती व संकरी पत्ती होने जाती हैं। फसलों को सुरक्षित रहने के निगरानी करने की जरूरत होती है। आवश्यकता पड़ने पर किसान कीटनाशक व खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग करें।
एक अगस्त से लगातार आठ अगस्त तक बारिश होती रही है। लगातार बारिश के बाद अब मौसम साफ हो गया है। ऐसे में खरीफ फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग व कीड़े लगने से फसलों के प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसके अलावा जलभराव से ही नुकसान होने की संभावना रहती है। कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक कुलदीप सिंह कुशवाहा ने बताया कि बारिश के बाद साफ हुए मौसम में फसलों की निगरानी करते रहें।
कृृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद निकल रही तेज धूप से फसलों में तुड़का कीड़ा लग सकता है। यह कीड़ा बाहर रहता है, जो धूप निकलने पर जमीन में घुस जाता है और पौधे के तने में लग जाता है। तना को कमजोर कर देता है और हवा चलने पर पौधा गिर जाता है। इल्ली लगने का भी खतरा होता है। इससे फसल खराब हो जाती है। इसके अलावा खेत में नमी भी नुकसान दे जाती है। खेत में नमी होने पर कीड़े बाहर रहते हैं, जो पौध में फली होने पर फली छेदक कर देते हैं। फली न होने पर पत्ती को पत्ती छेदक बना देते हैं। इससे फसल कमजोर हो जाती है।
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सावधानी से करें दवाइयों का प्रयोग
फसलों में कीटनाशक व खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग सावधानी के साथ करें। परेशानी होने पर दस्ताने और सुरक्षा किट को पहन लें। गमछा से मुंह को बांधें। फुलशर्ट पहनें। चप्पल की जगह जूता पहनकर काम करें। दवा डालने के बाद हाथों को साबुन से धोएं। नहाकर ही खाना खाएं।
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खरीफ फसलों में जलभराव को खाली कर दें। आवश्यकता अनुसार दवाइयों का छिड़काव करें। दवाइयां पंजीकृत दुकानों से खरीदें और बिल जरूर लें। जिससे नुकसान होने की स्थिति में लाभ दिलाया जा सके।
- राजीव कुमार भारती, जिला कृषि अधिकारी