ललितपुर। फाल्गुन माह में बसंती बयार चलने लगी है। पक्षियों की सुरीलीं आवाजें सुनाई देने लगी हैं। वहीं नन्हीं सी गौरैया फुदकती, कूदती हुई घर-आंगन और स्कूलों में चीं-चीं की आवाज करती हुई दिखाई देने लगी हैं। नगर के एक शिक्षक ने गौरैया को संरक्षित करने की पहल की है।
शिक्षक पुष्पेंद्र जैन बताते हैं कि गत वर्ष गौरैया संरक्षण के लिए बच्चों ने लकडी व गत्ते के घोसले बनाए थे। उन घोसलों को विद्यालयों में भी लगाया गया था। जिनमें गौरैया आकर बैठकर चीं-चीं की मधुर आवाज करती हुई दिखाई देने लगी है। गौरैया दाना लाकर घोंसलों में बैठे हुए नन्हें बच्चों को दाना चुगाती है। इस दृश्य को देखकर बच्चों के मन में करुणा की भावना जागृत हो रही है। बच्चे अपने मित्रों को भी गौरैया संरक्षण की प्रेरणा दे रहे हैं। 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस ज्यों-ज्यों नजदीक आ रहा है नन्हीं गौरैया घर,आंगन और विद्यालयों में चीं-चीं की सुमधुर ध्वनि करती हुई दिखाई दे रही है। बताते चलें बच्चों ने गतवर्ष घर-आंगन, बाग-बगीचों, स्कूलों में गौरैया के लिए लकड़ी, गत्ते के गौरैया घर बनाकर लगाए गए थे। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का सजग प्रहरी बनकर गौरैया संरक्षण के लिए एक छोटा सा प्रयास किया था जो सफल होते हुए दिखाई दे रहा है।
गौरैया संरक्षण को लेकर आयोजित होंगी प्रतियोगिताएं
शिक्षक पुष्पेंद्र जैन ने बताया कि करुणा इंटरनेशनल ललितपुर व मड़ावरा केंद्र के तत्वावधान में विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। जिसके अंतर्गत बच्चों से लकड़ी और गत्ते के गौरैया घोसलों के साथ-साथ चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से नन्हीं गौरैया के आकर्षक चित्रों को बनवाया जाएगा। जिससे बच्चे गौरैया संरक्षण के लिए आगे आएं। प्रतियोगिता के माध्यम से अन्य बच्चे भी जागरूक हों और गौरैया संरक्षण के लिए अपना सहयोग प्रदान करें।