पुलवारा/ललितपुर। शासन भले ही परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों से बेहतर बनाने का प्रयास करा रहा हो, लेकिन विभागीय जिम्मेदार शासन के प्रयासों को पलीता लगा रहे हैं। इसकी बानगी ब्लॉक बार में देखने को मिल रही है। यहां पर सत्र बीतने के चार माह बाद भी किताबें विद्यायों में बच्चों को वितरित नहीं की गईं हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
परिषदीय विद्यालयों में अध्यनरत बच्चों को शासन द्वारा मुक्त किताबे उपलब्ध कराई जातीं हैं, जो सत्र शुरू होने के दौरान वितरित की जातीं हैं, लेकिन ब्लॉक बार में नया सत्र शुरू होने के चार माह बाद भी विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंचीं हैं। ऐसे में बच्चे पुरानी किताबों से पढ़ाई करने के लिए मजबूर बने हुए हैं। वहीं कई बच्चे किताबों न मिलने से बिना किताबों के ही आगे की पढ़ाई करने का दंभ भर रहे हैं।
बिना किताबों के बच्चे कैसे निजी विद्यालयों के बच्चों की बराबर की शिक्षा पा सकेंगें, जब किताब ही नहीं तो पढाई की गुणवत्ता की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। हद तो तब हो गई, जब किताबें ब्लॉक स्थित संसाधन केंद्र पर किताबें पहुंचने के बाद भी विद्यालयों में नहीं पहुंचाई जा रही हैं, यहां पर रखीं किताबें धूल फांक रहीं हैं।
ब्लॉक संसाधन केंद्र के प्रशिक्षण हॉल का हाल में पसरी अव्यवस्थाएं
ब्लॉक संसाधन केंद्र बार के प्रशिक्षण हॉल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। लाखों रुपए के बजट के बावजूद भी प्रशिक्षण हॉल में लगे पंखे टूटे हुए लगे हुए हैं। बिजली व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
किताबें देरी से आ रहीं हैं, पर्याप्त मात्रा में सभी किताबें आने पर विद्यालयों में भेजी जा रही हैं।
रामप्रवेश, जिला विद्यालय निरीक्षक