ललितपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जन्मजात मूक बधिर बच्चों को चिह्नित करने के लिए शिविर लगाया गया। शिविर में 19 बच्चों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिसमें 17 बच्चों को कोकलियर सर्जरी (कान की सर्जरी) के लिए चयनित कर कानपुर भेजा गया है। जहां पर जांच के बाद सर्जरी की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीपी शुक्ला ने बताया कि आरबीएसके, दिव्यांगजन और डॉ. अपेक्षा फाउंडेशन ग्वालियर के सहयोग से ईएनटी मेहरोत्रा फाउंडेशन द्वारा इन मूक बधिर बच्चों का उपचार किया जाता है। शिविर में 17 बच्चों को कोकलियर सर्जरी के लिए कानपुर रेफर किया गया है। जहां पर जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि कितने बच्चे सर्जरी के लिए योग्य हैं। नोडल अधिकारी डॉ. अजय भाले ने बताया कि आरबीएसके शून्य से 19 साल तक के बच्चों के इलाज के लिए काम करता है।
चार तरह के विकार (डिफेक्ट) सहित कुल 40 बीमारियों के लिए परामर्श के साथ इलाज सरकारी खर्च पर कराया जाता है। इसमें ह्दय रोग, बहरापन, मोतियाबिंद, कटे होंठ-तालू, मुडे़ पैर, एनीमिया, दांत टेड़े-मेढे़ होना, बिहैवियर डिसआर्डर, लर्निंग डिसआर्डर, डाउन सिंड्रोम, हाइड्रो सिफलिस, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट आदि बीमारियां प्रमुख हैं। इन बच्चों का नि:शुल्क इलाज व ऑपरेशन प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में क राया जाता है। वहीं, उच्चतम इलाज के लिए लखनऊ, कानपुर और अलीगढ़ भेजा जाता है। आरबीएसके के मैनेजर डॉ. सुखदेव पंकज ने बताया कि आरबीएसके कोकलियर सर्जरी अधिकतम पांच वर्ष आयु के बच्चों की ही संभव है। इस तरह के ऑपरेशन में बच्चे की उम्र जितनी कम हो उतना ऑपरेशन करने में आसानी होती है।