ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय के अनुसार धर्मशास्त्रों में दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्वपूर्ण होता है। धर्मशास्त्रोक्त दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में है।
प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है और महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए उपयुक्त होता है। इस साल अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल प्राप्त हो रहा है। वैसे महानिशीथ काल की पूजा मध्यरात्रि 12:40 से 2 बजे के मध्य की जा सकती है।
ये है प्रदोष काल
दिन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते हैं, जहां दिन विष्णुस्वरूप हैं वहीं रात माता लक्ष्मी स्वरूपा हैं। दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है। इस प्रकार प्रदोष काल में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है और प्रदोष काल में ही दीप प्रज्जवलित करना उत्तम फ ल दायक होता है। स्थिर लग्न में पूजा करना लाभप्रद होता है।
प्रदोष काल शाम 05:19 से 07: 53 बजे तक रहेगा।
पूजन एवं खाता पूजन हेतु शुभ मुहूर्त स्थिर लग्न वृश्चिक दिन में 07:59 बजे से लेकर 10:16 तक
कुम्भ स्थिर लग्न दिन में 2:09 से 3: 40 तक
वृष स्थिर लग्न रात्रि 6:45 से 8:41 तक विद्यमान रहेगा।