महापंचायतें होंगी
आगामी 10 अक्तूबर को प्रयागराज में खनिक श्रमिकों की एक महापंचायत बुलाई गई है। इसमें प्रयागराज, विंध्य, मिर्जापुर और मध्यप्रदेश के सतना और आसपास के इलाकों के खनिक श्रमिक भारी संख्या में शामिल होंगे। इसमें केंद्र-राज्य सरकारों की उस नीति का विरोध किया जाएगा जिसके अंतर्गत इन पहाड़ों का खनन बड़ी-बड़ी कंपनियों को दिया जा रहा है। इससे यहां रहने वाले सामान्य गरीब किसानों-श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हो रही है। इस महापंयायत के माध्यम से सरकारों को चेतावनी दी जाएगी कि वे बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को पहाड़ों के खनन का अधिकार देने से बचें और यहां के मूल कोल जनजाति और अन्य सामान्य किसानों को खनन का अधिकार दें। ये मांगे न मानने से विरोध को और तेज किया जाएगा।
इसके बाद 18 अक्तूबर को कौशांबी में महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद एक-एक कर अन्य क्षेत्रों में महापंचायत बुलाकर किसानों को कृषि कानूनों के विरुद्ध लामबंद किया जाएगा और विधानसभा चुनाव में भाजपा के विरोध का रास्ता अपनाया जाएगा।
भाजपा ने कहा, जनता की अदालत में होगा निर्णय
किसानों की इस रणनीति से टकराव की आशंका पर टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि लखीमपुर की घटना पूरी तरह राजनीतिक ष़डयंत्र है। जनता ने देखा कि किस प्रकार किसानों के पीछे छिपकर कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर इस तरह की परिस्थिति पैदा की गईं, जिससे हिंसा हो और सरकार की बदनामी हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है, वह सबकुछ देख रही है और इसका अंतिम फैसला उसी की अदालत (विधानसभा चुनाव) में होगा।
नेता ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की छवि कठोर प्रशासक की रही है और इस तरह की घटनाओं को अंजाम देकर उनकी इस साख पर सवाल उठाने की कोशिश हो रही है। जनता यह देख रही है कि विपक्ष किस तरह यहां की घटनाओं पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह राजनीति काम नहीं आएगी।