लखीमपुर खीरी। तिकुनिया क्षेत्र के खैरटिया गांव में मंदिर के पुजारी महंत मोहन दास को निवाला बनाने वाली बाघिन का अब नया ठिकाना लखनऊ का प्राणि उद्यान बनने वाला है। बाघिन को बेहोश किए जाने के आदेश जारी हो गए हैं। उसकी तलाश में वन विभाग जंगल की सघन कांबिग कर रहा है।
खैरटिया जंगल के पास बसे गांव में एक मंदिर के पुजारी को निवाला बनाने वाली बाघिन को तलाश कर उसे पिंजडे में कैद करने या फिर बेहोश कर पकड़ने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक से सैद्घांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके बाद बाघिन को तलाशने के लिए वन विभाग की टीमें हाथियों और जालीदार कवर से ढके ट्रैक्टर के जरिए जंगल में सघन कांबिंग कर रही हैं। डाक्टरों की टीम भी साथ में है। ताकि बाघिन को देखते ही उसे बेहोश किया जा सके। बिना बेहोश किए बाघिन को पकड़ने के लिए पिंजड़ा भी लगाया गया है लेकिन चालाक बाघिन वन विभाग के हत्थे नहीं चढ़ी। उसकी तस्वीरें लगाए गए कैमरों में कैद हो रही हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि बाघिन एक इंसान का शिकार करने के बाद उसे खा चुकी है। इंसान का खून बाघिन के मुंह में लग चुका है। इससे उसके उसके आदमखोर होने की आशंका बढ़ गई है। बाघिन अब इंसानों को आसान शिकार समझ कर दूसरे लोगों का शिकार कर सकती है, ऐसी दशा में बाघिन को जंगल में खुला छोड़ना खतरे से खाली नहीं है। इसे देखते हुए बाघिन को पकड़ने के बाद इसे लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में भेजने पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल उसे तलाश करना बड़ी चुनौती है।
लखनऊ चिड़ियाघर में पहले से हैं छेदी, रेनू समेत खीरी के पांच बाघ
खीरी जिले के जंगलों से रेस्क्यू किए गए पांच बाघों को पहले से ही नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान लखनऊ में पनाह मिली हुई है। वर्ष 2009 में किशनपुर सेंक्चुरी के कांपटांडा से एक बाघ को रेस्क्यू किया गया था। यह बाघ लखनऊ चिड़ियाघर में ‘किशन सिंह’ के नाम से पल रहा है। वर्ष 2013 में मैलानी रेंज जंगल से पकड़े गए बाघ को ‘मैलानी’ के नाम से ही चिड़ियाघर में रखा गया है। मैलानी रेंज के ही छेदीपुर गांव में नौ लोगों को निवाला बनाने वाले बाघ को बेहोश कर लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया था। यह ‘छेदीसिंह’ के नाम से दर्शकों को लुभा रहा है। वर्ष 2018 में निघासन रेंज में ग्रामीणों के हमले में घायल हुई बाघिन को रेस्क्यू कर लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया था। इस बाघिन का नाम ‘रेनू’ रखा गया है। इन सभी बाघों को चिड़ियाघर में अलग घर मिले हुए हैं।