भोले के दीवाने कहीं नंगे पांव, तो कहीं लेटकर पहुंचे बाबा के धाम
गोला गोकर्णनाथ। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में छोटी काशी शिवमय हो उठी। भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु कहीं नंगे पांव तो कहीं जमीन पर दंडवत कर भोलेनाथ की पूजा करने पहुंचे। उत्साह इतना था कि तमाम शिवभक्त मस्तक पर त्रिपुंड की छाप और मुख से ओम नम: शिवाय का जाप कर रहे थे।
मंगलवार को पौराणिक शिव मंदिर के कपाट ब्रह्म मुहूर्त में ही खोल दिए गए। नगर और दूरदराज से आए शिव भक्तों ने कतारबद्ध होकर भोलेनाथ का गंगाजल, गन्ने का रस, शहद और दूध से अभिषेक किया। पुष्प, धतूरा, भांग, बेर, बेलपत्र, मिष्ठान, धूप, दीप भगवान भोलेनाथ को अर्पित किया। वहीं अन्य शिव भक्त सुबह से देर रात शिवलिंग का अभिषेक करने आते रहे। इस दौरान ओम नम: शिवाय, हर हर भोले, बम बम भोले के उद्घोष मंदिर गुंजायमान रहा।
कोविड के कारण दो वर्षों बाद दिखा आस्था का संगम
वैश्विक महामारी कोविड के कारण दो वर्ष तक आस्था पर पहरा रहा। पौराणिक शिवालय पर महत्वपूर्ण आयोजनों में भी वर्ष 2020 और 21 में प्रतिबंध रहे। अब कोविड से उबरने पर शिवभक्त अपने आराध्य आभार प्रकट करने के लिए शिव धाम पहुंचे, इसलिए दो वर्षों बाद पौराणिक शिव मंदिर पर आस्था का संगम जुटा।
गोला के भोला को युवाओं का नमन
समाज में आधुनिकता चाहे कितनी भी सिर चढ़कर बोल रही हो, लेकिन देश का युवा अभी अपनी आस्था और संस्कृति से जुड़ा है। छोटी काशी में जहां एक ओर हजारों श्रद्धालुओं का संगम था, उनमें युवाओं का अंदाज-अलग ही था। मोबाइल से भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा के साथ सेल्फी। वहीं युवा मस्तक पर त्रिपुंड लगाए गोला के भोला को तीर्थ के जल से नमन करते दिखे।
आस्था के संगम पर नजरें गड़ाए रहे अधिकारी
महाशिवरात्रि पर गोला के शिव मंदिर में भक्तों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था चौकस रखी गई। इस दौरान एसडीएम अविनाश चंद्र मौर्य, तहसीलदार विनोद कुमार गुप्ता और सीओ संजय नाथ तिवारी, राजेश कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था देखी। इस दौरान एएसपी अरुण कुमार सिंह भी शिव मंदिर पहुंचे और अधीनस्थों को दिशा निर्देश दिए।
डाकघर ने लगाया गंगाजल का स्टॉल
भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक का अपना अलग ही महत्व है। भक्तों को गंगा जल उपलब्ध कराने के लिए डाक विभाग द्वारा गंगाजल का एक स्टॉल लगाया गया।