दुधवा पार्क में घास के मैदान पर खड़ा गैंडा।
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लखीमपुर खीरी। गैंडों की गणना का काम अधूरा रह जाने के कारण जल्द ही दोबारा इनकी गणना होगी। इस बार गैंडों का डीएनए सैंपल लेकर विश्लेषण करते हुए गैंडों की सही संख्या का पता लगाया जाएगा। साथ ही दुधवा के सभी गैंडों की डीएनए प्रोफाइल भी तैयार की जाएगी। दोबारा होने वाली गैंडों की गणना में गैंडा विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी। 20 और 21 अप्रैल को दो दिन चली गैंडों की गणना में 75 फीसदी क्षेत्र में ही गणना हो पाई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के दक्षिण सोनारीपुर रेंज के गैंडा पुनर्वासन फेज-1 और बेलरायां रेंज के फेज-2 में 20 और 21 अप्रैल को गैंडों की गणना की गई। यह गणना असम से आए विश्व प्रकृति निधि गैंडा परियोजना के प्रमुख डॉ. अमित शर्मा के के निर्देशन में हुई। इसमें सात टीमें लगाई गई थीं। गणना के पहले दिन 19 अप्रैल को हुए प्रशिक्षण में प्रख्यात पशु चिकित्सक गुवाहाटी वेटनरी कॉलेज के शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष पद़्मश्री डॉ. केके शर्मा, गैंडा गणना विशेषज्ञ डॉ. अमित शर्मा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर और दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, उपनिदेशक डॉ. कैलाश प्रकाश, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. मुदित गुप्ता ने गैंडा गणना कार्य में लगे कर्मियों को गणना की बारीकियां बताईं।
गैंडा गणना में दक्षिण सोनारीपुर रेंज में स्थित गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 में कुल पांच टीमें लगाई गईं। इस टीम ने 17 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में काम किया। बेलरायां रेज के गैंडा पुनर्वासन फेज-2 में दो टीमों ने 14 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में गणना का काम किया। फेज-1 के करीब एक तिहाई क्षेत्र दलदलीय है और बड़ी बड़ी घास उगी है। इस कारण गणना का कार्य नहीं हो पाया। इस तरह संपूर्ण क्षेत्र 41 किलोमीटर के सापेक्ष मात्र 31 वर्ग किलोमीटर मीटर क्षेत्र में ही गणना हो सकी। करीब 25 फीसदी क्षेत्र में गणना नहीं हो पाई। गणना कार्य में जीपीएस से लैस एम स्ट्राइप्स एप का इस्तेमाल किया गया। ड्रोन कैमरों की भी मदद ली गई।
गणना के दौरान दोनों परिक्षेत्रों में दिखे कुल 40 गैंडे - गणना से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के बाद दुधवा में न्यूनतम 40 गैंडों की गिनती की गई। इनमें 28 वयस्क, चार उपवयस्क और आठ शिशु शामिल हैं। 28 वयस्क गैंडों में सात नर, 16 मादा हैं। पांच का पता नहीं लग पाया। चार उपवयस्क गैंडों में एक मादा है जबकि तीन की पहचान नहीं हो पाई है। आठ गैंडा शिशुओं में भी अभी तक यह पता नहीं चला है कि कितने नर हैं और कितने मादा। गणना कार्य सिर्फ 75 फीसदी क्षेत्र में ही हुआ है। इससे यह माना जा रहा है कि दुधवा में गणना में दिखाई पड़े 40 गैंडों से संख्या कहीं ज्यादा है।
चार साल पहले हुई गणना में यहां मिले थे 34 गैंडे - इससे पहले 2017 हुई गैंडों की गणना में यहां 34 गैंडे मिले थे। वर्ष 2018 में भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने गैंडों की विष्ठा से डीएनए सैंपल लेकर उनका विश्लेषण करने के बाद यहां 38 गैंडे होने का पता लगाया था। तब से अब तक इन 38 गैंडों में से तीन गैंडों की मौत हो चुकी है। जबकि चार साल के अंदर आठ से दस गैंडा शिशुओं का जन्म हुआ है। इस तरह मौजूदा समय में यहां 45-46 गैंडे होने का अनुमान लगाया जा रहा है।