गोला में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के निकट चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन नैमिष धाम के आचार्य गोविंद जी मिश्रा ने गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति के लिए भक्तों में शरणागत भाव होना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पूजा शुरू कराई। इससे क्रोधित इंद्र ने भारी वर्षा कराई। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिनों तक उनकी रक्षा की। सात दिन बाद इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ और उनका अहंकार समाप्त हुआ।
कथा व्यास ने बताया कि सात दिनों में 56 पहर होते हैं। बारिश थमने के बाद मैया यशोदा और ब्रजवासियों ने हर पहर के हिसाब से 56 प्रकार के पकवान बनाकर भगवान कृष्ण को प्रेमपूर्वक खिलाए। तभी से छप्पन भोग की परंपरा चली आ रही है। इस अवसर पर गोवर्धन पर्वत धारण किए भगवान कृष्ण की मनोहारी झांकी सजाई गई।
इस मौके पर अंजनी शरण जी महाराज, मुख्य यजमान विजय वाजपेई, नीलम बाजपेई, अभय बाजपेई, शिवांगी, पालिकाध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, आनंद त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।