लखीमपुर खीरी। बंजरिया गांव निवासी विश्वेश्वर दयाल की भूमि की पैमाइश के मामले में भले ही शासन ने चार बड़े अफसरों पर कार्रवाई कर दी है, पर अभी यहां स्थानीय स्तर पर तहसील के किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है। यह हाल तब है, जब इस मामले में एक कानूनगो पर पांच हजार रुपये घूस लेने का आरोप पीड़ित ने लगाया था, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था।
पीड़ित विश्वेश्वर दयाल की भूमि पैमाइश का मामला बीती 23 अक्तूबर को तब प्रकाश में आया था, जब इस मामले में सदर विधायक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में सदर विधायक ने खुद ये बात एसडीएम सदर अश्वनी सिंह से कही थी कि जो पांच हजार रुपये कानूनगो ने जमीन की पैमाइश के नाम पर विश्वेश्वर दयाल से लिए हैं, वह वापस कराए जाएं।
23 अक्तूबर के इसी घटनाक्रम के बाद मामला शासन तक पहुंचा और जांच शुरू हुई। जांच के करीब 20 दिन बाद ही शासन ने लखनऊ मंडल के अपर आयुक्त न्यायिक द्वितीय घनश्याम सिंह व पूर्व में खीरी में तैनात रहे एडीएम अरुण सिंह, एसडीएम विधेश और रेनू को निलंबित कर दिया। ये सभी वे अधिकारी हैं, जिनके यहां वर्ष 2019 से विश्वेश्वर की भूमि पैमाइश के मामले की फाइलें पहुंचती रहीं।
मामले में कई स्तर पर हुई लापरवाही सामने आने के बाद इन अफसरों पर हुई कार्रवाई तो समझ आ रही है, पर एक सवाल ये भी है कि मौके की जांच कर विभिन्न रिपोर्ट इन अधिकारियों को देने वाले कर्मचारियों की कोई जवाबदेही अब तक क्यों तय नहीं की गई। सबसे अहम तो राजस्व निरीक्षक पर कोई कार्रवाई न होना सवाल खड़े करता है, जिस पर पांच हजार रुपये घूस लेने का आरोप है।
मामले में विश्वेश्वर दयाल ने जो भी आरोप रुपये देने के लगाए थे, उस संबंध में तहसीलदार सदर से जांच कराई गई थी। जांच में आरोपी कानूनगो ने लिखित में दिया था कि कोई रुपये नहीं लिए गए हैं। इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई। - अश्वनी सिंह, एसडीएम सदर, लखीमपुर खीरी
दो बीघा जमीन के विवाद में लापरवाही ले डूबी चार अफसरों को
लमीमपुर खीरी। बंजरिया गांव में पैमाइश के जिस मामले में एक आईएएस व तीन पीसीएस अफसर निलंबित कर दिए गए। इतना ही नहीं खीरी के वर्तमान व और पूर्व डीएम से शासन ने जवाब तलब कर लिया, उसमें मात्र दो बीघा जमीन का विवाद है, जिसमें पीड़ित विश्वेश्वर दयाल का कहना है कि उसकी ये जमीन गांव के ही दो विपक्षी जोते हैं।
शुक्रवार को बंजरिया गांव में अपने खेत पर मौजूद विश्वेश्वर दयाल ने बताया कि मामले में शासन से की गई कार्रवाई से उनके संतुष्ट होने या न होने से क्या होता है, क्योंकि न तो उनका काम अब तक हुआ और न ही उनके रुपये वापस कराए गए हैं। विश्वेश्वर दयाल ने बताया कुल 11 बीघा उनका खेत है, जिसमें से गांव के ही दो विपक्षी दो बीघा जमीन जोते हें। उस पर गन्ना गो रखा है। लखनऊ स्तर से मामले में कार्रवाई के बाद स्थानीय प्रशासन ने इतना जरूर किया है कि उनके खेत के पास से एक तरफ चकमार्ग को खुलवा दिया है, पर उनकी भूमि से न तो विपक्षियों का कब्जा हटा है और न ही अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई हुई है। संवाद