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संसाधन नहीं मिले पर खत्म नहीं हुई लक्ष्य पाने की इच्छाशक्ति

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तृप्ती अवस्थी - फोटो : LAKHIMPUR
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संसाधन नहीं मिले पर खत्म नहीं हुई लक्ष्य पाने की इच्छाशक्ति
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लखीमपुर खीरी। हॉकी के जादूगर और महान खिलाड़ी रहे मेजर ध्यानचंद के नाम पर देश भर में हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर खेलों को बढ़ावा देने के खूब वादे और दावे होते हैं, लेकिन सरकारी उदासीनता कहें, या जिम्मेदार अधिकारियों में इच्छा शक्ति का अभाव। संसाधन, जागरूकता और प्रोत्साहन के अभाव में जिले में खिलाड़ियों की लहलहाती फसल सूखती चली जा रही है। यहां तक कि गांव की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी किसी तरह जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। उपेक्षा को लेकर नए और पुराने खिलाड़ियों की टीस लगभग एक सी है।
धौरहरा निवासी पैरा क्रिकेटर विक्रम नाग ने गरीबी में पलकर और संसाधनों के अभाव में बांग्लादेश में टीम को जितवाकर नाम रोशन किया, मगर आज वह अपने छोटे भाई के साथ लखनऊ में एक मोबाइल रिपेयरिंग दुकान पर काम कर परिवार की रोजी रोटी चलाने को मजबूर है। विक्रम नाग के पिता कोतवाली में चौकीदार थे, जिनकी कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है। विक्रम बताते हैं कि बचपन से ही क्रिकेट का शौक था लेकिन आर्थिक तंगी के चलते बल्ला भी नहीं खरीद सके। इसलिए टेनिस स्टिक से क्रिकेट खेलते थे। लखनऊ में नौकरी के दौरान ही उन्हें ट्रॉयल की जानकारी हुई, जिसमें शामिल हुए और यूपी टीम में चयनित हो गए। 2016 में प्रदेश की टीम के कप्तान बने और 2018 में इंडिया पैरा क्रिकेट टीम में चयन हुआ। इसके बाद वह क्रिकेट खेलने बांग्लादेश गए, जहां पर देश को 2-1 से जीत मिली। उसके बाद पाकिस्तान का दौरा पुलवामा अटैक और बांग्लादेश का दौरा कोरोना संक्रमण के कारण नहीं हो सका।
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विक्रम ने बताया कि वह 2018 से दिव्यांग महिला टीम को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। सरकार से न तो कोई संसाधन मिले हैं और न ही कोई सहायता। जिले में भी सुविधाएं न के बराबर हैं।
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जेएस सिंह : निशानेबाजी में किया कमाल
राष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाले जीएस सिंह बताते हैं कि बचपन से उन्हें निशानेबाजी का शौक था, लेकिन इसके लिए न तो संसाधन थे और न ही कोई प्रशिक्षण देने वाला। इसके बावजूद पूरी लगन के साथ अभ्यास करते रहे और जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक जीतने का मौका मिला। कानपुर की आर्डिनेंस फैक्टरी परिसर में 1994 में हुई 38वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई बल्कि जिले का नाम भी रोशन किया।
2001 में दिल्ली में हुई स्कीट शूटिंग में सिल्वर मेडल, 2003 में चेन्नई में हुई जीवी लांवकर ट्रैप शूटिंग में कांस्य पदक और 2008 में स्कीट शूटिंग में दो स्वर्ण पदक जीते। उनका कहना है कि खेल के लिए संसाधन होना जरूरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरत है जज्बे ओर लगन की। जब तक सीखने की लगन नहीं होगी तब तक कुछ भी नहीं किया जा सकता।
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तृप्ति : कठिन हालात में भी हाकी में हासिल की मंजिल
बिना संसाधन और कठिन परिस्थितियों में तृप्ति अवस्थी ने महिला हॉकी में जिले के नाम को चमकाया।
तृप्ति बताती हैं कि उन्होंने आर्यकन्या इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 1987 में हाकी खेलना शुरू किया। उस समय कॉलेज में इंदू मिश्रा पीटीआई थीं और विष्णु प्रकाश शर्मा कोच। जिन्होंने न केवल हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया बल्कि प्रशिक्षण भी दिया। महज आठ महीने में ही पटियाला में हुई सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में खेलने का मौका मिला। यहीं से उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण में हो गया और वह देहरादून हॉस्टल चली गईं। यहां से उनके खेल सफर को रफ्तार मिली। वर्ष 1991 में हिसार और 1993 में जालंधर में हुई नेशनल जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में खेलने का मौका मिला। 1993 में पारिवारिक कारणों से कुछ समय के लिए व्यवधान पड़ा लेकिन खेल के प्रति जज्बा बरकरार रहा। 1994 में तमिलनाडु में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी हॉकी टूर्नामेंट में कानपुर यूनिवर्सिटी की टीम का नेतृत्व करते हुए अच्छा प्रदर्शन किया।
तृप्ति का कहना है कि जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन उन्हें निखारने की जरूरत है। पर्याप्त संसाधन मिलें, तो खीरी में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है।
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खेल दिवस पर सिर्फ अंडर-14 हॉकी प्रतियोगिता
लखीमपुर खीरी। खेल दिवस कोरोना के कारण इस बार फिर उस अंदाज में नहीं मनाया जा सकेगा, जैसा कि पहले मनाया जाता था। जिला क्रीड़ा अधिकारी सुनील कुमार भारती का कहना है कि कोरोना काल से पहले खेल दिवस पर कई प्रतियोगिताएं कराई जाती थीं। मगर इस बार कोरोना के कारण कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सिर्फ अंडर-14 हॉकी प्रतियोगिता कराई जाएगी, जिसमें विजेता और उप विजेता टीम को पुरस्कृत किया जाएगा। संवाद

जीएस सिंह- फोटो : LAKHIMPUR

विक्रम नाग- फोटो : LAKHIMPUR

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