2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई धौरहरा सीट
2008 में परिसीमन से पहले जिले में लोकसभा की एक ही सीट थी, लेकिन परिसीमन के बाद पहली बार धौरहरा लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। इसमें आधा लखीमपुर का तो आधा सीतापुर जिले का हिस्सा है। खीरी से इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कस्ता, मोहम्मदी और धौरहरा विधानसभा क्षेत्र हैं, तो सीतापुर जिले से महोली और हरगांव विधानसभा क्षेत्र। जबकि खीरी संसदीय क्षेत्र में जिले के ही पांच विधानसभा क्षेत्र सदर, गोला, श्रीनगर, निघासन और पलिया शामिल हैं। 2009 से लेकर अब तक इस सीट पर सपा नहीं जीती है।
विपक्षी खेमे से निपटने के लिए भाजपा में भी समीकरणों की चर्चा
सपा के सीट बंटवारे के एलान के बाद से ही भाजपा में भी हलचल बढ़ गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा ने अपना आंतरिक सर्वे और एक तीसरी पार्टी से सर्वे कराया है। शरद वाजपेयी की शहर में होर्डिंग लगी हैं। भाजपा जिले में ब्राह्मण और कुर्मी वोट के अपने समीकरण को बरकरार करने में जुटी है। हालांकि, पदाधिकारी अभी कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
खीरी सीट पर अखिलेश का रहा जोर
18 जनवरी को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिला इकाई की लखनऊ में बैठक कर साफ संदेश दिया था कि लखीमपुर की दोनों सीटों पर चुनाव लड़ना प्राथमिकता है, लेकिन खीरी लोकसभा सीट पर वह कोई समझौता नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी कार्यकर्ताओं व बड़े नेताओं से भी अखिलेश यादव अक्सर पूछते रहे हैं कि भाजपा के सांसद को खीरी में कौन हरा सकता है।
इसीलिए उत्कर्ष वर्मा को भी आगे किया गया, जबकि इसी बात से नाराज होकर पार्टी में महासचिव रहे रवि वर्मा ने सपा का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया। समाजवादी सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव के लिए खीरी संसदीय सीट अब नाक का सवाल बन गई है, जिसे वह किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।