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सपा, बसपा और कांग्रेस में खाता खोलने की होड़, भाजपा को गढ़ बचाने की चुनौती

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Neta Ji - फोटो : iStock
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एक-दो सीटों को छोड़ शेष पर आमने-सामने कांटे की टक्कर
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लखीमपुर खीरी। 2022 में भाजपा के सामने आठों सीटों पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है तो वहीं विपक्षी दलों सपा, बसपा, कांग्रेस सहित अन्य दलों के सामने खाता खोलने की। विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा ने जनपद की सभी आठ सीटें जीतकर विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया था। भाजपा अपनी आठों सीटों पर कब्जा बरकरार रखने के लिए जुटी है तो विपक्षी दलों द्वारा भी मतदाताओं को रिझाने के लिए कोशिश कर रहे हैं।
पिछले तीन चुनावों पर नजर डालें तो 2012 में आठ सीटों में से भाजपा को एक सीट पर जीत मिली थी, जबकि सपा ने चार और बसपा ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में अचानक मोदी लहर से हवा बदली, जिससे कई दशकों से हाशिये पर रही भाजपा ने दोनों लोकसभा सीटों पर कब्जा जमा लिया। इसके तीन साल बाद 2017 में विधानसभा चुनाव हुए, तब भाजपा के पास सीएम का चेहरा नहीं था। फिर भी जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों से प्रभावित होकर भाजपा को प्रचंड बहुमत देते हुए आठों सीटें उनकी झोली में डाल दी थीं। ऐसा जनपद के इतिहास में पहली बार हुआ कि आठों सीटों पर विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ हो गया था।
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इस बार 2022 में भाजपा के पास मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ जैसा बड़ा चेहरा है, लेकिन उतनी ही बड़ी चुनौती भी है। आठ सीटों पर दोबारा जीत का परचम लहराना इतना आसान नजर नहीं है, क्योंकि विपक्षी दलों ने भी पूरी ताकत झोंक रखी है। जातिवादी समीकरण के सहारे मतदाताओं को साधने की कोशिशें की जा रही हैं। 2014, 2017 व 2019 के चुनावों में भाजपा को लगातार मिल रही जीत से भाजपा खेमा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहा है, तो वहीं नई सपा का नारा देकर चुनाव मैदान में सपा प्रत्याशी भी जनसमर्थन के सहारे अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। बसपा भी कुछ सीटों पर जीत का दावा कर रही है। (संवाद)
स्थानीय मुद्दों से ज्यादा मोदी-योगी के कार्यों का सहारा
पिछले कुछ चुनावों से स्थानीय मुद्दे जनता के बीच अपनी जगह नहीं बना पा रहे हैं। इस बार चुनाव में भाजपा ने विकास के साथ ही कानून व्यवस्था अहम मुद्दा बनाया हुआ है। मोदी-योगी द्वारा किए जा रहे कार्यों को गिनाया जा रहा है। साथ ही भाजपा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के सहारे हिंदुत्व का मुद्दा भी उठा रही है। कर्नाटक में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर चल रहे विवाद की सोशल मीडिया पर चर्चा है। सपा ने लावारिस पशुओं के साथ ही पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का मुद्दा जनता के बीच उठाते हुए भाजपा सरकार को घेरा है। तो वहीं बसपा अपने पिछले कार्यकाल में किए गए कार्यों के नाम पर जनता का समर्थन हासिल करने के प्रयास में है, जबकि कांग्रेस तिकुनिया कांड और किसानों के मुद्दे और महिला सम्मान के मुद्दे पर मैदान में है।
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सदर को छोड़ अन्य सीटों पर आमने-सामने सीधा मुकाबला
लखीमपुर (सदर) विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी योगेश वर्मा और सपा प्रत्याशी उत्कर्ष वर्मा के बीच कड़ा मुकाबला है, तो बीच में बसपा प्रत्याशी मोहन वाजपेयी भी ब्राह्मण व दलित वोटों के सहारे त्रिकोणात्मक संघर्ष की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। श्रीनगर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी मंजू त्यागी और सपा प्रत्याशी रामसरन के बीच कड़ा मुकाबला नजर आ रहा है। वहीं बसपा प्रत्याशी मीरा बानो भी मुस्लिम व दलित मतदाताओं के सहारे परिणाम अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही हैं। धौरहरा विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी विनोद शंकर अवस्थी और सपा प्रत्याशी वरुण सिंह के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। बसपा प्रत्याशी आनंद मोहन त्रिवेदी भी वोटों में सेंध लगाने का प्रयास कर रहे हैं। मोहम्मदी विधानसभा भाजपा प्रत्याशी लोकेंद्र प्रताप सिंह और सपा प्रत्याशी दाउद अहमद के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार हैं, लेकिन बसपा प्रत्याशी शकील अहमद सिद्दीकी भी मुस्लिम व दलित वोटों के सहारे परिणाम अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। कस्ता विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी सौरभ सिंह सोनू और सपा प्रत्याशी सुनील कुमार लाला के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। गोला विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी अरविंद गिरि और सपा प्रत्याशी विनय तिवारी के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं, क्योंकि यहां पर बसपा ने नया चेहरा उतारा है। निघासन विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी शशांक वर्मा और सपा प्रत्याशी आरएस कुशवाहा के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा है। हालांकि बसपा प्रत्याशी आरए उस्मानी भी जोर आजमाइश कर रहे हैं। पलिया विधानसभा में भी भाजपा प्रत्याशी हरविंदर कुमार उर्फ रोमी साहनी और सपा प्रत्याशी प्रीतिइंदर सिंह के बीच सीधा मुकाबला है। लेकिन, असली हार जीत किसकी होगी इसका फैसला 10 मार्च को हो जाएगा।
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