गन्ने की मोटाई व लंबाई अधिक होने से 25 प्रतिशत पैदावार होगी ज्यादा
लखीमपुर खीरी। शरद कालीन गन्ना बुवाई करने का समय आने को है। विशेषज्ञ ने किसानों को सिंगल बड चिप विधि से गन्ने की बुवाई करने की सलाह दी है। इस विधि से गन्ने की बुवाई करने से प्रति हेक्टेअर लागत में 16250 रुपये की कमी आएगी। यानी बुवाई में 50 क्विंटल बीज की बचत होगी। गन्ने की मोटाई व लंबाई अधिक होने के कारण 25 प्रतिशत ज्यादा पैदावार होगी।
चीनी मिलों के गन्ने का बकाया भुगतान न किए जाने के बावजूद गन्ना किसानों की पहली पसंद बना हुआ है। जिले में करीब तीन लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। इससे नौ चीनी मिल, 25 क्रेशर और सैकड़ों कोल्हू पर गन्ने की आपूर्ति होती है। पिछले कुछ वर्षों से गन्ने की फसल पर रेड रॉट (लाल सड़न रोग) का प्रकोप होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। इससे विशेषज्ञों ने उपचारित बीज का प्रयोग करने के साथ ही सिंगल बड चिप विधि से गन्ने की खेती करने पर जोर दिया है।
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि सिंगल बड चिप विधि से गन्ने की बुवाई करते समय सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं। लाइन से लाइन की दूरी चार फीट होनी चाहिए। टुकड़े से टुकड़े की दूरी 1.5 फीट रखी जाए। ट्रेंच विधि से केवल एक लाइन में बुवाई की जाए और ट्रेंच की गहराई एक फीट होनी चाहिए। टुकड़ों के ऊपर पांच सेमी से ज्यादा मिट्टी न हो। पाटा कदापि न लगाएं। इस तरह शत-प्रतिशत जमाव होगा और कल्लों की संख्या 35 प्रतिशत ज्यादा होगी। कल्लों की मृत्यु दर नगण्य हो जाएगी। इसके साथ सह फसली खेती करके किसान अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
गन्ना गिरने से प्रति एकड़ 15 हजार का नुकसान
जिन खेतों में तेज हवा से गन्ने की फसल गिर गई है, उनमें नुकसान से बचने के लिए तुरंत उपाय करने की सलाह दी गई है। गन्ना गिरने से प्रति एकड़ 45 क्विंटल वजन कम होने की संभावना रहती है। पौधा गन्ना जड़ से उखड़ने के कारण अगले वर्ष पेड़ी में 20 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ वजन का नुकसान होता है। फसल लागत में 2500 से 3000 रुपये तक बढ़ोत्तरी हो जाती है। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश पटेल ने बताया कि बरसात व तेज हवा से गिरे हुए गन्ने को उठाकर दो दिन के अंदर बंधाई कराएं अन्यथा दो दिन बाद गन्ना उठाने पर टूट सकता है।