लखीमपुर खीरी। जिले की सबसे प्राचीन और समृद्ध रियासत खैरीगढ़ स्टेट की राजधानी सिंगाही में बने भव्य भवन और मंदिर इसके वैभव को दर्शाते हैं। यहां बने भवन और मंदिर महारानी सुरथ कुमारी शाह की स्थापत्य और कलात्मक रुचि का प्रतीक है। सिंगाही कस्बे से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित भूलभुलैया शिव मंदिर अनूठी शिल्पकला की बेजोड़ कलाकृति है।
भूलभुलैया शिवमंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। मंदिर का निर्माण वर्ष 1927 में शुरू हुआ। इसे बनने में एक साल से अधिक का समय लगा। इसका निर्माण काल 1927-28 माना जा रहा है। मंदिर के शिलालेख पर वर्ष 1927 अंकित है। इसका निर्माण तत्कालीन खैरीगढ़ स्टेट की महारानी सुरथ कुमारी शाह ने अपने पति दिवंगत राजा इंद्र विक्रम शाह की स्मृति में कराया था। उन्होंने इस भव्य और विशाल मंदिर में नर्मदेश्वर महादेव की स्थापना की। तंत्र साधना के लिए भी यह मंदिर जाना जाता है।
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर (भूलभुलैया शिव मंदिर) सिंगाही कस्बे से डेढ़ किलोमीटर दूर पवित्र सरयू नदी के तट पर प्राकृतिक परिवेश में बना हुआ है। मंदिर की ऊंचाई जमीन की सतह से करीब 55 फिट है। मंदिर तीन प्रखंडों में निर्मित है। मंदिर का आधार एक पक्का चबूतरा है। जो जमीन की सतह से 10 फिट की ऊंचाई पर है। मंदिर का प्रवेशद्वार दक्षिण की ओर है और नीचे के प्रखंडों में चारों ओर प्रवेश मार्ग है। जिनमें सीढ़ियां बनी हुई हैं, जो तीनों प्रखंडों को आपस में मिलाती हैं। इन प्रखंडों में बने प्रवेश द्वारों की ऊंचाई करीब दो फिट है। इसमें बैठकर ही प्रवेश संभव है। संभवत: यह द्वार तंत्र साधना और सुरक्षा के लिए निर्मित कराए गए हैं। यह द्वार दर्शकों को भ्रम में डाल देते हैं। क्योंकि इसकी ऊंचाई समान और वास्तु शिल्प एक जैसी है। इसलिए इसे भूलभुलैया कहते हैं। इस मंदिर में दो प्रदक्षिणा पथ हैं। गर्भगृह तक पहुंचने के लिए चक्करदार सीढ़ियां बनी हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग श्याम रंग का है। जनश्रुति के अनुसार इस भूलभुलैया से सिंगाही स्थिति राजमहल व कई अन्य स्थानों तक जाने जाने वाली भूमिगत सुरंगें थीं, जिन्हें काफी समय पहले बंद करा दिया गया था। भूलभुलैया में स्थित भगवान नर्मदेश्वर महादेव मंदिर का बाह्य भाग नक्काशीदार दीवार छोटे-छोटे गुंबदों व मीनारों से सुसज्जित है।
भूलभुलैया मंदिर का है यह दर्शन
पुरातत्ववेत्ताओं का कहना है कि मंदिर के नीचे भूलभुलैया होने के पीछे दर्शन यह है यह संसार और सृष्टि एक भूलभुलैया है। मनुष्य इसमें भटकता रहता है। जब वह अपनी आध्यात्मिक शक्ति के जरिये इस भूलभुलैया से मुक्त हो पाता है तभी ईश्वर को प्राप्त करता है और उसे मोक्ष मिलता है। इसी दर्शन के आधार पर भूलभुलैया के ऊपर शिवमंदिर बनाया गया है।
देखरेख के अभाव में सौंदर्य खो रहा मंदिर
मंदिर का स्वामित्व और देखरेख का दायित्व महारानी सुरथ कुंवरी न्यास के पास है। ट्रस्ट की ओर से राजपरिवार से संबंधित मनुराज सिंह भूलभुलैया मंदिर की देखरेख करते हैं। लेकिन उचित देखरेख के अभाव में मंदिर अपना प्राचीन वैभव खोता जा रहा है।
जिले की अनमोल विरासत है भूलभुलैया शिव मंदिर
नगर पंचायत सिंगाही के उत्तम कुमार मिश्र का कहना है कि भूलभुलैया शिव मंदिर जिले की एक अनमोल धरोहर है। पर्यटन विभाग से कई बार इस अनमोल विरासत को अपने संरक्षण और देखरेख में लेने का आग्रह किया गया लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई। दुधवा नेशनल पार्क के निकट होने के कारण यह सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकता है।
सीमित संसाधनों से संरक्षण का किया जा रहा प्रयास
महारानी सुरथ कुंवरी ट्रस्ट की ओर से भूलभुलैया शिव मंदिर की देखरेख करने वाले मनुराज सिंह का कहना है कि सीमित संसाधनों से जितनी देखरेख संभव है, की जा रही है। कस्बे से दूर सरयू नदी के किनारे स्थित मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण आसपास के लोग अतिक्रमण कर रहे हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन को भी अवगत कराया जा चुका है। पर्यटन विभाग से भी संरक्षण के लिए प्रयास जारी हैं।