यह एफआईआर सुमित जायसवाल नाम के व्यक्ति ने दर्ज कराई थी, जिसका दावा था कि दंगल कार्यक्रम का उद्घाटन करने आ रहे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत में जाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं में वह भी शामिल था। दंगल कार्यक्रम केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के पैतृक गांव बनवीरपुर में आयोजित हुआ था। अजय मिश्र के बेटे आशीष उर्फ मोनू को शनिवार को चार किसानों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
तिकोनिया क्षेत्र में तीन अक्तूबर को प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें चार किसानों के अलावा दो भाजपा कार्यकर्ता, गाड़ी का ड्राइवर और एक पत्रकार थे। जायसवाल के अनुसार, पत्रकार रमन कश्यप, कार ड्राइवर हरि ओम और भाजपा कार्यकर्ताओं- शुभम मिश्रा और श्याम सुंदर की प्रदर्शनकारियों ने पीट-पीटकर हत्या की थी। हालांकि पत्रकार के परिजनों का आरोप है कि पत्रकार की मौत भी कथित रूप से किसी गाड़ी की टक्कर से ही हुई थी।
जायसवाल द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ आवेदनकर्ता काले शरण चौक जा रहे थे और ये लोग महिंद्रा थार (यूपी 31 एएस 1000) में मौजूद थे। गाड़ी चला रहा हरिओम और मेरा दोस्त शुभम मिश्र मुख्य अतिथि का स्वागत करने जा रहे थे। किसान आंदोलन के बीच मौजूद अराजक तत्वों ने गाड़ी पर लाठियों, ईटों और पत्थरों से हमला कर दिया, जिससे ड्राइवर चोटिल हो गया और उसने सड़क के एक किनारे गाड़ी खड़ी कर दी।
जायसवाल ने एफआईआर में आरोप लगाया, इसके बाद कथित प्रदर्शनकारियों ने हरिओम को कार से बाहर निकाला और उसपर लाठियों और तलवार से हमला कर दिया। हम पर पत्थरों से हमला किया गया था और वहां से भागने की कोशिश में कथित प्रदर्शनकारियों ने मेरे दोस्त शुभम मिश्रा को पकड़ लिया और उसे पीटने लगे।
जायसवाल ने दावा किया कि वह किसी तरह मौके से भागने में कामयाब रहा नहीं तो उसकी भी हत्या कर दी जाती। जायसवाल ने कहा कि उन्हें बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि हरिओम और शुभम मिश्रा की हत्या कर दी गई और दो अज्ञात भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई है।
यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उसने दोनों एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है। अधिकारियों के अनुसार, पहली एफआईआर में दर्ज केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष समेत तीन अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।