इसके बाद कुर्मी नेताओं के सम्मेलन में रवि वर्मा को मंच पर जगह न देकर स्थानीय नेताओं के साथ बैठाया गया, इससे वह नाराज थे और अगले ही दिन राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे सबक लेते हुए यादव बिरादरी के पूर्व जिलाध्यक्ष ने पूर्व विधायक के कॉलेज में कार्यकर्ता सम्मेलन रखा, जिसमें पहले दिन रवि वर्मा नहीं दिखे। दूसरे दिन जब मंच पर जगह तो मिली लेकिन अखिलेश यादव ने रवि वर्मा से बात नहीं की।
रवि वर्मा ने कहा कि दिल्ली से बुलाने के बाद आज तक अखिलेश यादव ने हमसे बात नहीं की। पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि रवि वर्मा का विरोध तभी शुरू हुआ था जब उन्होंने अपनी बेटी पूर्वी को सपा बसपा गठबंधन को 2019 में चुनाव लड़ाया था। यादव बिरादरी के पूर्व जिलाध्यक्ष पर पूर्वी को हराने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें यहां से हटाकर शाहजहांपुर चुनाव प्रभारी बनाया गया था। लेकिन, आलाकमान आंतरिक गुटबाजी पर नियंत्रण नहीं कर सका।
2024 में दिलचस्प हो सकता है चुनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में रवि वर्मा के कांग्रेस में जाने से चुनाव काफी दिलचस्प हो सकता है। क्योंकि, इससे भाजपा को कुर्मी वोट संभालने में मुश्किल हो सकती है। हालांकि, धौरहरा से भाजपा की रेखा वर्मा सांसद हैं, लेकिन रवि वर्मा खीरी सीट से ही संसद में पहुंचे हैं। ऐसे में अगर भाजपा ने खीरी संसदीय सीट से कोई कद्दावर नेता उतारा तो उसके खिलाफ रवि वर्मा चुनौती बन सकते हैं।
सपा के पूर्व सदर विधायक जिनको एक गुट प्रोजेक्ट कर रहा है। उनकी सियासत में कितनी स्वीकार्यता होगी। इस पर समाजवादी पार्टी में ही संशय बना हुआ है। फिलहाल सपा की जिला इकाई इसी मंथन में लगी है। उधर, पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ताजे सियासी हालात को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी बड़े नेताओं को लखनऊ बुलाया है।