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UP: सपा छोड़ने के बाद रवि वर्मा बोले- अखिलेश मेरी सुन नहीं रहे थे; पढ़ें इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी

Sat, 04 Nov 2023 04:34 PM IST
मुकेश कुमार आशीष कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा ने शुक्रवार को पार्टी में अंदरूनी कलह से परेशान होकर सपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में सपा में बने सिंडिकेट और खाने कमाने की प्रवृत्ति को वजह बताया। उन्होंने कहा कि अब अखिलेश मेरी नहीं सुन रहे। इसलिए इस्तीफा दिया है। 
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव, रवि प्रकाश वर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करीब दो दशक तक समाजवादी सिपाही रहे पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा ने सपा का साथ छोड़ दिया। शुक्रवार को 20 साल की समाजवादी सियासत के सफर को विराम देते हुए जब उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया तो उनका गला भर आया। रवि वर्मा बोले, अब अखिलेश मेरी नहीं सुन रहे थे। इसलिए वह अब प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। राष्ट्रीय महासचिव के पद से उन्होंने पांच महीना पहले इस्तीफा तभी दे दिया था, जब वह यादव बिरादरी के नए नेताओं की गुटबाजी से आहत थे। फिलहाल, कुछ ही दिन में कांग्रेस उनका नया ठिकाना होगी। उधर, पार्टी सूत्रों के मुताबिक सपा के सभी नेताओं को लखनऊ तलब किया गया है।

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दो दशक से भी ज्यादा समय तक सपा में तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा के सदस्य रहे रवि प्रकाश वर्मा के खिलाफ माहौल इसी साल उस समय बनने लगा था, जब उन्हें जनवरी 2023 में तीसरी बार पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। इसके बाद से ही यादव बिरादरी के पूर्व जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में रवि वर्मा का विरोध शुरू हो गया था। 

अखिलेश के सामने भिड़े थे नेता 
पांच महीने पहले जब लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में कुर्मी नेताओं को बुलाया था। तब अखिलेश ने 2024 का चुनाव लड़ाने की बात पूछी तो रवि वर्मा के साथ अन्य सजातीय नेता का नाम आया। इस पर पूर्व सदर विधायक की शिकायत हुई। वहां पर रवि वर्मा और दूसरे सजातीय नेता पूर्व सदर विधायक के गुट की अखिलेश के सामने भिड़ंत हो गई। 

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इसके बाद कुर्मी नेताओं के सम्मेलन में रवि वर्मा को मंच पर जगह न देकर स्थानीय नेताओं के साथ बैठाया गया, इससे वह नाराज थे और अगले ही दिन राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे सबक लेते हुए यादव बिरादरी के पूर्व जिलाध्यक्ष ने पूर्व विधायक के कॉलेज में कार्यकर्ता सम्मेलन रखा, जिसमें पहले दिन रवि वर्मा नहीं दिखे। दूसरे दिन जब मंच पर जगह तो मिली लेकिन अखिलेश यादव ने रवि वर्मा से बात नहीं की। 

रवि वर्मा ने कहा कि दिल्ली से बुलाने के बाद आज तक अखिलेश यादव ने हमसे बात नहीं की। पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि रवि वर्मा का विरोध तभी शुरू हुआ था जब उन्होंने अपनी बेटी पूर्वी को सपा बसपा गठबंधन को 2019 में चुनाव लड़ाया था। यादव बिरादरी के पूर्व जिलाध्यक्ष पर पूर्वी को हराने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें यहां से हटाकर शाहजहांपुर चुनाव प्रभारी बनाया गया था। लेकिन, आलाकमान आंतरिक गुटबाजी पर नियंत्रण नहीं कर सका।

2019 का लोक सभा चुनाव
पार्टी- प्रत्याशी- वोट
भाजपा- अजय मिश्र टेनी- 609589
सपा- पूर्वी वर्मा-219000
कांग्रेस- जफर अली नकवी- 92155 वोट

चार बार सांसद रहे रवि वर्मा
रवि प्रकाश वर्मा तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा से सांसद रहे हैं। 1998 में वह अटल सरकार में पहली बार लोकसभा चुनाव जीते थे। इसके बाद 17 महीने तक चली सरकार के बाद 2000 में फिर चुनाव हुए, जिसमें वह सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 2004 में हुए चुनाव में वह फिर लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। 2009 में वह हार गए। जबकि, 2014 से 2016 तक वह राज्यसभा में रहे।

सपा ने बसपा से आए नेता को बनाया राष्ट्रीय सचिव
हाल ही में बसपा से आए और लखनऊ निवासी नेता को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। इससे भी रवि वर्मा आहत बताए गए। कहा कि लगता है हमारा विकल्प बनाया गया है। उधर, उनके सजातीय पूर्व विधायक भी उन पर हमलावर हैं।
 

डॉ पूर्वी वर्मा ने नहीं दिया त्यागपत्र
डॉक्टर पूर्वी वर्मा ने बताया कि उनके पिता ने सपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है किंतु वह अभी समाजवादी पार्टी में ही हैं। अपने पिता से परामर्श कर ही कोई निर्णय लेंगी। हालांकि सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा है कि कई बार कुछ फैसले लेने बेहद कठिन होते हैं। लेकिन जरूरी होते हैं।

2024 में दिलचस्प हो सकता है चुनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में रवि वर्मा के कांग्रेस में जाने से चुनाव काफी दिलचस्प हो सकता है। क्योंकि, इससे भाजपा को कुर्मी वोट संभालने में मुश्किल हो सकती है। हालांकि, धौरहरा से भाजपा की रेखा वर्मा सांसद हैं, लेकिन रवि वर्मा खीरी सीट से ही संसद में पहुंचे हैं। ऐसे में अगर भाजपा ने खीरी संसदीय सीट से कोई कद्दावर नेता उतारा तो उसके खिलाफ रवि वर्मा चुनौती बन सकते हैं। 

सपा के पूर्व सदर विधायक जिनको एक गुट प्रोजेक्ट कर रहा है। उनकी सियासत में कितनी स्वीकार्यता होगी। इस पर समाजवादी पार्टी में ही संशय बना हुआ है। फिलहाल सपा की जिला इकाई इसी मंथन में लगी है। उधर, पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ताजे सियासी हालात को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी बड़े नेताओं को लखनऊ बुलाया है।
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टेनी बोले, हमारे लिए कोई चुनौती नहीं
रवि वर्मा के सपा से इस्तीफे पर खीरी सांसद और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी ने कहा कि उन्हें रवि वर्मा से कोई चुनौती नहीं है। कहा, हमारे लिए ये सब कोई मुद्दा नहीं है। ये लोग तो पहले भी कभी किसी दल में तो कभी किसी दल में रह चुके हैं। बता दें कि 1998 से 2009 तक रवि वर्मा खीरी से सांसद रहे हैं, जबकि 2014 से अभी तक टेनी खीरी सीट से सांसद रहे हैं।
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