तालाब की भूमि पर पट्टों के बाद अब चारागाह की भूमि पर पट्टे किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। गोला तहसील की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 में चकबंदी प्रकिया के दौरान विभाग को मिले जिल्द बंदोबस्त अभिलेखों में जो भूमि चरागाह के रूप में दर्ज है, उस पर लंबे अरसे से खेती की जा रही है। इसका खुलासा क्षेत्र में चल रही चकबंदी प्रकिया के दौरान हुआ। हालांकि विभाग ने प्रक्रिया के दौरान चारागाह की भूमि को चकबंदी प्रकिया से तो मुक्त कर दिया, लेकिन राजस्व विभाग ने क्षेत्र में चकबंदी प्रकिया शुरू होने से पहले दर्जनों लोगों के चरागाह की भूमि पर पट्टे बनाकर उन्हें संक्रमणीय भूमिधर बना दिया।
तहसील गोला गोकर्णनाथ के ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 में गाटा संख्या 2 और 983 रकबा क्रमश: 2.306 एवं 0.822 हेक्टेयर भूमि चरागाह के रूप में दर्ज है। इसके चलते विभाग ने नियमानुसार इस भूमि को चकबंदी प्रकिया से आउट कर दिया। उधर क्षेत्र में चकबंदी प्रकिया शुरू होने से पहले ही राजस्व विभाग ने दर्जनों लोगों के चरागाह की भूमि के पट्टे बनाकर उन्हें संक्रमणीय भूमिधर बना दिया। इससे जिसको जहां पर पट्टे मिले थे, इनकी भूमि वहीं बनी रही। न मालियत कम हुई और न रकबा।
सरकारी अभिलेखों में राजस्व विभाग की मनमानी के चलते इसी तरह सैकड़ों एकड़ वन भूमि, तालाब, चरागाह, खलिहानों और शमशानघाट की जमीन के पट्टे बना दिए गए।
इस संबध में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी केलकर सिंह ने बताया के ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 में चल रही चकबंदी प्रकिया में गाटा संख्या 2 और 983 में रकबा क्रमश: 2.306 एवं 0.822 हेक्टेयर भूमि अभिलेखों में चरागाह के रूप में दर्ज है। धारा 52 प्रकाशन के बाद भी उपरोक्त भूमि बदस्तूर चरागाह दर्ज रहेगी।
एडीएम एसपी सिंह के अनुसार मामला संज्ञान में आया है। रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।