रेशम फांटा में घूमते नेपाली हाथी।
हाथियों ने मैलानी रेंज की महुरेना और भरगिवां बीट के जंगल से सटे खेतों में फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया
बांकेगंज। तीन दिन दक्षिण खीरी वन प्रभाग के सहजनिया जंगल में भटकने के बाद बुधवार को नेपाली हाथी किशनपुर सेंक्चुरी के रेशम फाटा जंगल में फिर लौट गए। इन हाथियों ने दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की महुरेना और भरगिवां बीट जंगल से सटे खेतों में फसलों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी और बफरजोन की जटपुरा बीट में तीन माह से डेरा जमाए नेपाली हाथी जंगल से सटे गांव के लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। नेपाली हाथी दिनभर आराम करने के बाद शाम को जंगल से निकलकर आसपास के खेतों में पहुंचकर धान और गन्ने की फसल को रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। ये हाथी किशनपुर सेंक्चुरी से लेकर शाहजहांपुर जिले की खुटार रेंज के अलावा दक्षिण खीरी वन प्रभाग की सहजनिया बीट तक खेतों में फसलें उजाड़ रहे हैं। ग्रामीणों और वन कर्मियों के खदेड़े जाने से हाथी और उग्र होकर निगरानी टीमों और ग्रामीणों पर हमले की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों के शोर मचाने पर हाथी फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद ही वहां से हटते हैं। निगरानी टीमों के मुताबिक बुधवार को हाथियों की लोकेशन किशनपुर सेंक्चुरी के रेशम फाटा में मिली है।
हाथी के हमले में मारे गए प्रांजल के पिता को दस हजार की सहायता
ममरी। मोहम्मदी रेंज के सहजनिया गांव में जंगली हाथी के हमले में मारे गए 22 वर्षीय युवक प्रांजल वर्मा के पिता भगवानदास वर्मा को घटना के दसवें दिन डब्ल्यूडब्ल्यूूएफ की ओर से 10 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता चेक के जरिए भेजी गई है। 11 अक्टूबर की शाम खेत देखने गए गांव सहजनिया निवासी भगवानदास वर्मा के 22 वर्षीय पुत्र प्रांजल को नेपाल के जंगली हाथी ने सूंड़ में लपेटकर पटककर मार डाला था। रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह ने मौके का निरीक्षण करने के बाद डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से 10,000 रुपये की तात्कालिक सहायता चेक के जरिए भेजी गई है। जो मृतक के पिता भगवानदास वर्मा को रिसीव करा दी गई है। संवाद