लखीमपुर खीरी। बाघिन को पकड़ने के लिए शुरू किए गए ‘मिशन मंझरा’ में 12 दिन के अंदर बाघ और बाघिन गिरफ्त में आ गए। बाघिन के पिंजरे में कैद होने के बाद मंझरा खैरटिया गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। इसके बावजूद भी वन विभाग पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि यही बाघिन आदमखोर है। इसके चलते वन विभाग ने मिशन मंझरा आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया है।
करीब 12 दिन पहले 18 जून की रात बाघिन ने खैरटिया गांव स्थित रामजानकी मंदिर के पुजारी महंत मोहनदास को मार डाला था। ग्रामीणों के आक्रोशको देखते हुए वन विभाग ने अगले ही दिन से ‘मिशन मंझरा’ नाम से बाघिन को खोजने और पकड़ने का अभियान शुरू किया था। इस अभियान के बीच ही बाघिन ने एक महिला समेत तीन और लोगों को मार दिया। 23 जून को खैरटिया जंगल के किनारे पशु चरा रहे 14 वर्षीय किशोर सूरज सिंह का बाघिन ने शिकार कर लिया।
26 जून को नरेंद्रनगर बेली के 33 वर्षीय नगेंद्र सिंह को बाघिन ने उस समय मार डाला, जब वह खेत में घास काट रहा था। रात दस बजे उसका अधखाया शव बरामद हुआ। अगले ही दिन 27 जून को खैरागौढ़ी गांव निवासी 40 वर्षीया महिला मिंदर कौर को बाघिन ने खेत में मार डाला।
ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा था। उधर, सर्च टीम में लगी टीमों को जो पगमार्क दिख रहे थे, उससे दो बाघिन होने की पुष्टि हो रही थी। लगाए गए कैमरों में भी दो बाघों की तस्वीरें ट्रैप हो रही थीं। इससे वन विभाग असमंजस में था कि इनमें से कौन बाघिन इंसानों को निवाला बना रही है। इसी बीच 27 जून की रात वन विभाग के लगाए गए पिंजरे में एक बाघ कैद हो गया। बाघ पूरी तरह स्वस्थ है। उसके दांत भी सुरक्षित हैं। इसलिए इस बाघ के आदमखोर होने की पुष्टि नहीं हो रही थी। इसके चलते वन विभाग ने अपना अभियान जारी रखा और आखिर 29 जून की रात बाघिन भी पिंजरे में कैद हो गई। स्वास्थ्य परीक्षण में इसके दो दांत टूटे पाए गए हैं।
बाघिन के रेस्क्यू आपरेशन में शामिल रही यह टीम
बाघिन को रेस्क्यू करने में डॉ. दया शंकर, डॉ. खनिन, डॉ. दक्ष गंगवार, डॉ. विजयेंद्र यादव, एसडीओ गिरिजापुरी अमित सिंह, कर्तनियाघाट के रेंजर रामकुमार, बेलरायां रेंजर विमलेश, वन दरोगा मोहम्मद उमर, लवलेश कुमार श्रीवास्तव, पुष्कर सिंह, हीरालाल, वनरक्षक जगमोहन मिश्रा, श्याम सिंह के अलावा चारों टीमों में दो दो एसपीटीएफ के जवान भी शामिल रहे। रेस्क्यू ऑपरेशन में चार हाथी जयमाला, चंपाकली, गंगाकली और डायना को भी लगाया गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी खुद दुधवा के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक और बफर जोन के उपनिदेशक सुंदरेश कर रहे थे। इनके अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ भी इसमें सहयोग कर रहा था।