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सूख गई दुधवा की लाइफलाइन सुहेली नदी

Thu, 18 Jun 2015 05:26 PM IST
पलियाकलां
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दुधवा नेशनल पार्क की लाइफ लाइन कही जाने वाली सुहेली नदी सिल्ट जमा हो जाने के कारण सूख गई है। इससे दुधवा के जंगली जानवरों के लिए पानी का संकट पैदा हो गया है। कड़ी धूप और भीषण गर्मी के कारण दुधवा के सूखे वाटर होल तो पार्क प्रशासन ने बोरिंग के जरिए भरवा दिए हैं लेकिन यह वाटर होल सुहेली नदी की भरपाई नहीं कर पा रहे हैं।
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सुहेली नदी को दुधवा की लाइफ लाइन कहा जाता है। यह पलिया तहसील के बसही गांव से निकल कर पार्क क्षेत्र में 30 किलोमीटर लंबाई में बहती हुई धौरहरा तहसील के ढखेरवा नानकार में घाघरा नदी से मिल जाती है। यह लाइफ लाइन अब पार्क के जानवरों को जीवन नहीं दे पा रही है। सिल्ट जमा होने से नदी पूरी की पूरी सूख चुकी है। सुहेली सूखने से जानवरों के पानी की तलाश में इधर-उधर भागने का खतरा पैदा हो गया है। इन खतरों के बावजूद अब तक सिल्ट सफाई के कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क वीके सिंह ने बताया कि सुहेली सूखने के बावजूद वन्यजीवों के लिए पानी का कोई संकट नहीं है। पार्क क्षेत्र के सभी सूखे वाटर होल बोरिंग के जरिए भरवा दिए गए है। पार्क में 37 वाटर होल के किनारे बोरिंग है। बाकी वाटर होल टैंकर के जरिए भरे गए हैं। दो सोलर ट्यूबवेल भी लगाए गए हैं।
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बारिश में तबाही का कारण बनती है सुहेली
सुहेली नदी से पलिया, निघासन और रमियाबेंहड़ ब्लाकों की 17493 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई के लिए 1977 में 6.40 करोड़ की लागत से बैराज बनाया गया लेकिन इसके निर्माण के लिए गलत स्थान का चयन होने से यह सिंचाई के काम तो नहीं आ सका, हर साल आने वाली बाढ़ से तबाही जरूर ला रहा है।
सिल्ट सफाई के लिए अर्से से हो रही है मांग
सुहेली नदी में सिल्ट जमा होने और सूखने का असर न सिर्फ  जानवरों पर बल्कि इंसानों पर भी पड़ता है। सिल्ट की वजह से नदी सूखी पड़ी है लेकिन बारिश के मौसम में इसी सिल्ट कारण नदी में आने वाली बाढ़ गांवों में तबाही भी मचाती है। ग्रामीण अर्से से इसकी सफाई की मांग करते आ रहे हैं।
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दुधवा की पारिस्थितिकी को प्रभावित करती है सुहेली
-सुहेली के सूखने पर वन्यजीवों के लिए पानी का संकट
-बारिश में बाढ़ का पानी जंगल में देर तक ठहरता है
-पानी लंबे समय तक जमा रहने से सूख रहा सॉल जंगल
-सॉल के सूखे पेड़ों की जगह उग रहे जामुन के पेड़

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